तकनीक के विकास के साथ जहां हमारी सुविधाएं बढ़ी हैं, वहीं धोखाधड़ी करने वालों के लिए भी नए-नए रास्ते खुल रहे हैं। इस कड़ी में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) साइबर ठगों का नया हथियार बन गया है। देशभर से एआई से ठगी के मामले सामने आने लगे हैं।
बचाव के लिए क्या करें...
ऐसे की जाती है एआई से ठगी
गूगल प्ले स्टोर के अलावा डार्क वेब पर कुछ ऐसे टूल्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से आसानी से साइबर ठग धोखाधड़ी कर लेते हैं। वायस क्लोनिंग एप, डीपफेक या दूसरे एप की मदद से आवाज और फोटो को बदल दिया जाता है। पहले आरोपी किसी न किसी तरह फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम व दूसरे कॉलिंग एप के जरिये वायस का सैंपल ले लिया जाता है। बाद में पीड़ित को उसका दोस्त, रिश्तेदार या करीबी बनकर कॉल किया जाता है।
रोज औसतन 650 ठगी की शिकायतें
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजधानी में औसतन हर दिन 650 साइबर ठगी की शिकायतें आती हैं। कोविड के बाद तो ठगी के मामलों में कई गुना बढ़ोतरी हुई। एनसीआरबी के आंकड़े देखे तो वर्ष 2020 में पूरे भारत में साइबर ठगी के 50035 मामले सामने आएं, वहीं 2021 में 52974 तो वर्ष 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.84 लाख हो गया।
देश में बढ़ते साइबर अपराध को देखते हुए एआई से साइबर ठगी एक नई चुनौती बनकर सामने आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पढ़े लिखे लोग भी आसानी से साइबर ठगों के शिकार बन जाते हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस तरह की ठगी के बारे में पता हो। उसके बाद सतर्कता से ही इसमें बचाव हो सकता है।