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स्कूल निर्माण मामला: उपराज्यपाल सक्सेना ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी, जानिए क्या है मामला?

Fri, 26 Aug 2022 03:30 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीडब्ल्यूडी ने कक्षाओं के निर्माण की वास्तविक जरूरत का आकलन करने के लिए एक सर्वेक्षण किया। इस आधार पर 194 स्कूलों में 7180 क्लास रूम के निर्माण का अनुमान लगाया गया। 194 स्कूलों में समकक्ष कक्षा कक्ष (ईसीआर) के मुताबिक 2404 के बजाय करीब तीन गुना क्लास रूम के निर्माण का आकलन किया गया।
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना - फोटो : ANI
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विस्तार
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने दिल्ली के स्कूलों में अतिरिक्त कमरों के निर्माण मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) की जांच रिपोर्ट पर सतर्कता विभाग से मांगी गई टिप्पणी पर ढाई साल की देरी पर मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में परियोजनाओं के निष्पादन में अनियमितताएं और प्रक्रियात्मक खामियां आने के बाद इस मामले में आगे की जांच के लिए दिल्ली सरकार के सतर्कता(सचिव)से 17 फरवरी, 2020 को अपनी टिप्पणी भेजने को कहा गया था। 

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उपराज्यपाल ने इस मामले में अत्यधिक देरी को गंभीरता से लिया। अतिरिक्त कमरों के निर्माण घोर अनियमितताओं को छिपाने और भ्रष्टाचार के संकेत मिलने सहित इस मामले में सीवीसी मैन्युअल के उल्लंघन की तरफ इशारा किया है। इस मामले में एलजी सचिवालय को एक शिकायत मिली थी। सभी पहलुओं की जांच के बाद सीवीसी ने कक्षाओं के निर्माण और इससे संबंधित आर्किटेक्ट फर्म की भूमिका की विस्तृत जांच की सिफारिश की थी।  

इससे पहले शिक्षा निदेशालय (डीओई) की तरफ से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री(पीडब्ल्यूडी) की मौजूदगी में 30 अप्रैल, 2015 को एक प्रस्तुति दी गई थी। मुख्यमंत्री ने छात्र-कक्षा अनुपात (50 से अधिक)पर चिंता व्यक्त करते हुए स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं निर्मित करने के निर्देश दिए थे। 207 स्कूलों में छात्र-कक्षा अनुपात 50 से अधिक होने पर इस कमी को पूरा करने के लिए 2526 अतिरिक्त क्लास रूम के निर्माण का निर्णय लिया गया। इनमें से 14 स्कूलों में पायलट आधार पर 121 कक्षाएं निर्मित होनी थी, लेकिन इन विद्यालयों में भी निर्माण नहीं किया गया। शेष 193 स्कूलों में 2405 कक्षाओं के निर्माण का जिम्मा पीडब्ल्यूडी को सौंपा गया।
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ईसीआर, क्लास रूम और दूसरे संदर्भों का आकलन बहुउद्देश्यीय हॉल, शौचालय, प्रयोगशाला, संगीत कक्ष जैसी सुविधाएं थीं, जिन्हें समकक्ष कक्षा कक्षों में परिवर्तित किया गया। 21 जून, 2016 को हुई एक समीक्षा बैठक में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री ने एक फर्म के परामर्श के बाद रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र(एसटीपी) को भी शामिल करने का निर्देश दिया।

  • सीवीसी को इस मामले में हुई अनियमितताओं के संबंध में 25 जुलाई को एक शिकायत मिली 
  • दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त क्लास रूम के निर्माण की लागत में बढ़ोतरी 
  • बगैर निविदा और अधिक विनिर्देशों को शामिल होने से निर्माण लागत में 90 फीसदी की बढ़ोतरी 
  • दिल्ली सरकार ने बिना टेंडर, लागत में बढ़ोतरी को 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी
  • कक्षाओं के निर्माण को ईसीआर(समकक्षा कक्षा कक्ष) के साथ आपस में बदल दिया गया। 
  • यह जीएफआर और सीपीडब्ल्यूडी वर्क्स मैनुअल का खुला उल्लंघन
  • निर्माण की खराब गुणवत्ता और अधूरे कार्य

 

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सीवीसी जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष
मूल रूप से प्रस्तावित और स्वीकृत कार्यों के लिए निविदाएं मंगवाई गई। बाद में प्रस्तावों में बदलावों के कारण अनुबंध मूल्य में भी 17 से 90 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई। लागत में 326.25 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो गई। यह निविदा राशि से  53 फीसदी अधिक है। बढ़ी हुई लागत का उपयोग केवल 4027 के निर्माण के लिए किया गया जबकि इससे 6133 कक्षाओं का निर्माण किया जाना था। इसके अलावा 194 विद्यालयों में 160 शौचालयों की जरूरत थी जबकि 37 करोड़ की लागत से 1214 शौचालय निर्मित करवाए गए। इससे प्रत्येक्ष क्लास रूम के निर्माण की औसत लागत में भी बढ़ोतरी हुई। निरीक्षण में सामने आया कि 29 के बजाय स्कूलों में केवल 2 वर्षा जल संचयन प्रणाली पाई गई।

इन परियोजनाओं के लिए स्वीकृत राशि 989.26 करोड़ रुपये थी जबकि निविदाओं के लिए 860.63 करोड़ रुपये अवार्ड होने के बावजूद वास्तविक खर्च बढ़कर 1315.57 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अतिरिक्त कार्यों के लिए कोई नई निविदा नहीं बुलाई गई और मौजूदा ठेकेदार भी दूसरे स्कूलों में काम कर रहे थे। कई कार्य अधूरे छोड़ दिए और कार्यों के  निष्पादन में गुणवत्ता में कमियां भी सामने आई थीं। इसे जीएफआर, सीपीडब्ल्यूडी वर्क्स मैनुअल और सीवीसी का घोर उल्लंघन बताया गया। 

अच्छे कामों को रोकने के लिए अब एलजी ने स्कूलों पर भी जांच शुरू की
इस मसले पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधान सभा में आरोप लगाया कि सीबीआई की छापेमारी के बाद भी जब उपमुख्यमंत्री पर केंद्र सरकार का दांव नहीं चला तो हमारे विधायकों के पास गए। अभी तक 12 विधायकों ने बताया है कि उनको 20-20 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया है। दो-चार और को लाने पर 25 करोड़ लालच 25 करोड़ रुपये का दिया गया। नहीं मानने पर धमकी भी दी गई है। बावजूद इसके कोई विधायक नहीं टूटा। यह लोग आप के 40 विधायकों को तोड़ना चाहते हैं। ऑपरेशन लोटस दिल्ली के नाम से इनका यह पूरा ऑपरेशन है। इसके लिए 800 करोड़ रुपये रख रखा है। अभी-अभी सूचना मिली है कि अब उपराज्यपाल ने स्कूलों पर भी जांच शुरू कर दी है। इनका मूल मकसद सारे काम को रोकना है। स्कूल रूक जाएं, अस्पताल रूक जाएं, जितने अच्छे काम हो रहे हैं, वो सारे रूक जाएं, जनता को तकलीफ हो रही है। इस सबके पीछे गुजरात है। जैसे-जैसे आप का ग्राफ गुजरात में बढ़ रहा है, यह लोग बेचैन हैं। अगर हम आज यह घोषणा कर दें कि हम गुजरात में चुनाव नहीं लड़ेंगे, तो ये सारी जांच बंद हो जाएगी।
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