नोटबंदी का 42वां दिन बैंकों के बाहर हल्की-फुल्की झड़प के बीच बीत गया। सेक्टर-58 के बैंक में नकदी समाप्त होने का पता चलते ही कतार में खड़े लोगों ने आपा खो दिया। नो कैश का बोर्ड चस्पा होते ही मिलीभगत की बात होने लगी और लोग हंगामा करने लगे।
पुलिस ने लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। यही हाल, सेक्टर-18,12-22 की कुछ बैंकों के बाहर भी देखने को मिला। देरशाम एटीएम के बाहर यही हाल रहा। नो कैश का बोर्ड देख कर थक चुके लोगों का धैर्य का बांध अब टूटने लगा है।
मंगलवार को शहर के अधिकांश बैंकों में पैसा तो पहुंचा, लेकिन पर्याप्त नकदी नहीं होने पर दोपहर बाद पैसा समाप्त होने का बोर्ड चस्पा कर दिया गया। कतार में खड़े लोगों को महज 6 हजार रुपये ही दिए गए। यही हाल एटीएम मशीनों का भी दिखा।
दिन भर एटीएम मशीनों में पैसा नहीं डाला गया। शाम को सेक्टर-18, 51, 41, 12-22 के कुछ एटीएम मशीनों में पैसा पहुंचा। जहां पहले से ही 150 से ज्यादा लोगों की कतार लगी रही। ऐसे में वहां भी नकदी के लिए मारामारी जैसा माहौल दिखा।
लोगों का कहना है कि सरकार ने दावा किया था कि नोटबंदी के दो से तीन सप्ताह बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी। बैंकों में नकदी पहुंच जाएगी। एटीएम में पैसा डाला जाएगा। ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। अब सभी दावों की पोल खुलती दिख रही है। न तो बैंको में पैसा पहुंच रहा है और न ही एटीएम में। ऐसे में लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
नोटबंदी का फैसला सही है, लेकिन रोज-रोज दिक्कत की मार झेलनी पड़ रही है। अब तो 30 दिसंबर का इंतजार है। तब हालात के बारे में पता लगेगा। - पंकज उपाध्याय, सलारपुर
सेक्टर-18 का हाल बेहाल है। मार्केट पूरी तरह से डाउन है। स्थिति न सुधरी तो दिक्कतें और बढ़ जाएंगी। - एस. केजैन, सेक्टर-18 अध्यक्ष