मुस्कान की वरिष्ठ अधिकारी शांति औलक कहती हैं कि कोरोना काल की स्थिति से कंपनियों की स्थिति जितनी खराब हुई है, उसे देखते हुए लगता है कि उनकी आर्थिक स्थिति सुधरने में दो से तीन साल तक का समय लग सकता है। लिहाजा इन कंपनियों से सीएसआर के रूप में आर्थिक सहयोग मिलना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी स्थिति में दिव्यांग जनों की सेवाओं के मामले में स्थिति बेहद खारब हो सकती है। इसका सीधा असर दिव्यांग लोगों की जिन्दगी पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ की राय
दिल्ली राजधानी क्षेत्र के पूर्व निःशक्त जन आयुक्त टीडी धरियाल ने कहा कि देश में दिव्यांग जनों की देखभाल के लिए केंद्र या राज्य सरकारों के स्तर पर कोई बड़ी संस्था नहीं है। एक-दो जगहों पर कुछ सेंटर चलाए जाते हैं, लेकिन दिव्यांग जनों की भारी संख्या के सामने ये नगण्य है। पूरे देश में यह कार्य स्वयं सेवी संस्थाओं के दम पर ही चलता है। ऐसे में अगर केंद्र या राज्य सरकारें इनका सहयोग नहीं करती हैं तो दिव्यांगों की हालत बेहद खराब हो सकती है। सरकारों को इनके लिए ठोस योजना समय रहते पेश करनी चाहिए।