कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर बॉर्डर पर धरने की शुरूआत किसान नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में हुई थी। पहले इसे पश्चिम उत्तर-प्रदेश के मुट्ठी भर किसानों का धरना बताया गया, लेकिन देखते ही देखते बॉर्डर पर किसानों की भीड़ बढ़ती ही चली गई। अब यहां यूपी, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट् के अलावा कुछ अन्य राज्यों के किसान भी पहुंच रहे हैं।
शुरूआत में गाजीपुर पुल (एनएच-24) के नीचे ही किसान धरने पर बैठे थे, लेकिन धीरे-धीरे किसान पुल के ऊपर गाजियाबाद ही ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। अब हालात यह है कि गाजीपुर धरना स्थल से करीब पौन किलोमीटर के एरिये में किसानों के ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर ही दिखाई देते हैं।
दिन के समय में दिल्ली-एनसीआर के लोग बड़ी संख्या में यहां घूमने आ आते हैं। बॉर्डर पर किसानों की जरूरत के हर सामान को उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। खाने-पीने के अलावा गर्म पानी के देसी गीजर, कंबल, रजाई, सर्दी से बचने के हर तरह के कपड़े का इंतजाम यहां हो चुका है। सड़क पर दूर तक किसी कबीलों की तरह से दिखने वाले तंबू लगे हैं। यहां जगह-जगह हुक्के और चाय के साथ सरकार से लड़ने की रणनीति तैयार होती रहती है।
बकायदा किसान आंदोलन का संचालन कर रही कमेटी के वालंटियर ने पूरे आंदोलन को संभाला हुआ है। साफ-सफाई से लेकर हर चीज का यहां ख्याल रखा जा रहा है। नौजवानों के साथ बुजुर्ग किसान भी यहां आंदोलन कर सरकार से लोहा ले रहे हैं। लंगर के अलावा मेडिकल कैंप, एंबुलेंस यहां 24 घंटे तैनात रहती हैं।