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Delhi : रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कैंसर के स्टेज-4 मरीजों पर संकट, मरीजों को नहीं मिल पा रही रेडियोथेरेपी

Sat, 16 Dec 2023 05:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

युद्ध ने रेडियो एक्टिव पदार्थ थोरियम की आपूर्ति में बाधा डाली है, जिससे अंतिम स्टेज के कैंसर से जूझ रहे मरीजों को रेडियोथेरेपी नहीं मिल पा रही है।
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demo pic... - फोटो : pixabay
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विस्तार
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रूस-यूक्रेन युद्ध से एम्स में कैंसर का इलाज करवा रहे स्टेज-4 के मरीजों पर संकट आन पड़ा है। इसने रेडियो एक्टिव पदार्थ थोरियम की आपूर्ति में बाधा डाली है, जिससे अंतिम स्टेज के कैंसर से जूझ रहे मरीजों को रेडियोथेरेपी नहीं मिल पा रही है। इस तरह की मरीजों का उपचार का इंतजार लगातार बढ़ रहा है। एम्स प्रशासन ने इसके लिए केंद्र सरकार से हरसंभव मदद की अपील की है।

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कैंसर के स्टेज-4 के मरीजों की रेडियोथेरेपी थोरियम से निकलने वाली रेडियोधर्मी किरणों से की जाती है। इस विधि को थेरानोस्टिक्स कहा जाता है। इसके लिए एम्स जर्मनी से डोज आयात करता है। एम्स का कहना है कि उच्च विशिष्ट गतिविधि ल्यूटेटियम-177 और अल्फा-उत्सर्जक रेडियोन्यूक्लाइड नाम की जो डोज जर्मनी से आयात होती है, जर्मनी उसके लिए रूस के थोरियम पर निर्भर है। 

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जर्मनी को थोरियम नहीं मिल पा रहा। इससे जर्मनी से आने वाली डोज प्रभावित हुई है। युद्ध से पहले एम्स को 30 से 35 मरीजों के लिए डोज मिल जाती थी, अब घटते-घटते यह संख्या महज तीन से चार के बीच है। इससे थेरानोस्टिक्स से इलाज करवाने आ रहे मरीजों की वेटिंग लगातार बढ़ गई है।
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टारगेट थेरेपी है थेरानोटिक्स
विशेषज्ञों का कहना है कि थेरानोटिक्स टारगेट थेरेपी है। इसमें बायोमोलेक्यूल्स का इस्तेमाल सीधे कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में होता है। आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं होता। एम्स के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर व प्रमुख डॉ सी एस बाल ने बताया अभी तक इसकी मदद से 91 मरीजों का सटीक इलाज किया है। करीब पांच साल बाद भी इनमें से 65 फीसदी से अधिक मरीज जिंदा हैं, जबकि अमूमन स्टेज-4 के मरीज अधिकतम 1-2 साल ही जिंदा रह पाते हैं।

अमेरिका से आए 10 मरीज
एम्स में थेरानोस्टिक्स से हो रहे इलाज के बेहतर परिणाम को नॉर्थ अमेरिकन सोसाइटी ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन की वार्षिक बैठक में मान्यता दी गई। इसे दुनिया की बेहतरीन तकनीक बताया गया है। एम्स प्रशासन की मानें तो विश्व स्तर पर मान्यता मिलने के बाद बीते तीन महीने में ही अमेरिका से 10 मरीजों ने एम्स में इस विधि से इलाज के लिए संपर्क किया। इसमें प्रोटेस्ट, थायराइड सहित अन्य कैंसर शामिल हैं। डोज के अभाव में मांग पूरी नहीं की जा सकी है।

लंग्स कैंसर पर जल्द होगी सुविधा
एम्स प्रशासन थेरानोस्टिक्स की मदद से जल्द लंग्स कैंसर का इलाज भी शुरू करेगा। इसके लिए जर्मनी से समझौता के मेडिकल कॉलेज से समझौता किया जाएगा। समझौता शुरू होने के बाद एम्स में लंग्स कैंसर के लिए भी इलाज शुरू होने की संभावना है।

80 फीसदी मरीजों को चार तरह का कैंसर
देश में 80 फीसदी मरीजों को केवल चार तरह का कैंसर है। इनमें प्रोटेस्ट, स्तन, कोलन और फेफड़े का कैंसर है, जबकि बचे हुए 20 फीसदी में ब्रेन, लिफोमा, बोन सहित अन्य सभी तरह के कैंसर शामिल हैं।

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