यमुना प्राधिकरण में आवंटियों की लीज डीड कराने के लिए सीईओ के फर्जी साइन से कमेटी बनाने का मामला सामने आया है। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि प्राधिकरण की तरफ से मिली शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच की जा रही है।
यमुना प्राधिकरण के अनुसार व्यक्तिगत कारणों से करीब दो माह के अवकाश पर जाने से पहले प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने 2 सितंबर को एक कमेटी का गठन किया। एसीईओ की अध्यक्षता में गठित इस कमेटी में डीसीईओ, महाप्रबंधक (वित्त), ओएसडी (भूलेख), महाप्रबंधक (नियोजन), महाप्रबंधक/उप महाप्रबंधक (परियोजना), सहायक विधि अधिकारी और प्रबंधक (संपत्ति) को सदस्य बनाया गया।
इस कमेटी का काम यह था कि अगर इस दौरान कोई आवंटी लीज डीड कराने आता है तो वह उसका बकाए व अन्य शर्तों का निरीक्षण करेगी और सब कुछ ठीक मिलने पर लीज डीड संपन्न कराएगी। उनके जाने के बाद एक फर्जी कमेटी का गठन कर लिया गया और मूल कमेटी के पत्र पर सीईओ के हस्ताक्षर को स्कैन कर इस फर्जी कमेटी के पत्र पर चिपका दिया गया। पत्रांक संख्या भी वही रखी गई। इस कमेटी का अध्यक्ष एसीईओ को ही रखा गया है। साथ ही महाप्रबंधक वित्त, महाप्रबंधक नियोजन, महाप्रबंधक प्रोजेक्ट, ओएसडी, तहसीलदार, प्रबंधक व सहायक विधि अधिकारी को सदस्य बनाया गया।
इस दौरान मूल कमेटी के सदस्यों को बता दिया गया कि पहली कमेटी के बाद सीईओ ने संशोधित कमेटी बना दी है, जबकि सीईओ को इस मामले की जानकारी ही नहीं थी। हाल ही में जब सीईओ वापस आए तो उन्हें इस बात का पता चला। पड़ताल करने पर फर्जी कमेटी की बात सामने आई। इस पर सीईओ ने एसीईओ को जांच कर 24 घंटे में रिपोर्ट देने को कहा। साथ ही एसएसपी से इस मामले में मुकदमा दर्ज करने को कहा। प्राधिकरण की शिकायत पर कासना कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
सूत्रों का कहना कि मूल कमेटी में कुछ ऐसे सदस्य थे, जो किसी भी गलत काम का विरोध करते। इस वजह से सीईओ के हस्ताक्षर को स्कैन कर संशोधित कमेटी बनाने का खेल रचा गया। इसमें एक वरिष्ठ अधिकारी और एक प्रबंधक का नाम सामने आ रहा है। आशंका जताई गई है कि कुछ आवंटियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की फर्जी कमेटी बनाई गई।
मेरे हस्ताक्षर को स्कैन या फोटोकॉपी के जरिये यथावत रख गलत तरीके से समिति बनाने का मामला संज्ञान में आया है। मूल समिति के कई सदस्य इस कमेटी में शामिल नहीं किए गए। इसकी जांच एसीईओ को सौंपी गई है। 8 नवंबर को रिपोर्ट देने को कहा गया है। दोषी पाए जाने वाले प्राधिकरण कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसकी एफआईआर दर्ज करा दी गई है। फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल हैं, इसकी जांच की जा रही है। - डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ, यमुना प्राधिकरण