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पैसे हड़पने के लिए लगाया गैंगरेप का झूठा आरोप

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मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी व छह युवकों को गैंगरेप में फंसाने वाली महिला को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करना भारी पड़ गया।
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अदालत ने माना कि महिला ने धोखाधड़ी करके छह युवकों को गैंगरेप मामले में फंसा दिया। अदालत ने अब महिला को तलब करके स्पष्टीकरण मांगा है।

अदालत ने यह भी कहा कि अगर वह सही समय पर जवाब नहीं देती तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

'पत्नी से गैंगरेप और पति खामोश है'

न्यायमूर्ति पीके भसीन व न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा की खंडपीठ ने कहा, ‘पेश तथ्यों से स्पष्ट है कि महिला से रेप की पुष्टि नहीं हुई थी। उसने अपहरण व गैंगरेप का आरोप लगाया है, लेकिन पति ने कहीं भी शिकायत नहीं की।

पत्नी गायब हो और पति आराम से घर में बैठा रहे यह संभव नहीं है। इसके अलावा महिला पर धोखाधड़ी के दो अन्य मामले भी विचाराधीन हैं। वे महसूस करते हैं कि महिला की अपील विचार योग्य ही नहीं है।

पूरा मामला महिला द्वारा युवकों से पैसे लेने का था और जब उन्होंने नौकरी न मिलने पर पैसे वापस मांगे तो गैंगरेप में फंसा दिया गया।’

शान से जी रही है शाही जिंदगी

खंडपीठ ने महिला को 15 मई को पेश होने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि वह अब भी युवकों से लिए 18 लाख 40 हजार रुपये वापस करने के लिए तैयार है तो सहानुभूति बरती जाएगी, वरना कार्रवाई होगी।

महिला के खिलाफ रोहतक में 89/10 व अमन विहार में भी धोखाधड़ी का मामला विचाराधीन है।

महिला ने पति की आय 70 हजार रुपये वार्षिक बताई है, फिर भी वह कार, दो मोबाइल, पांच बच्चों का खर्च व शाही जिंदगी कैसे जी रही है। स्पष्ट है कि उसने आरोपियों से पैसे ठगे।
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यह है पूरा मामला

पेश मामले के अनुसार, रोहिणी निवासी महिला ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि खरखौदा सोनीपत निवासी नरेंद्र व अन्य नौकरी दिलाने का रैकेट चलाकर उगाही करते थे।

उसने इसका पर्दाफाश किया तो नरेंद्र, सांपला निवासी कपिल, राजेश उर्फ अनिल निवासी देव काले सांपला, अनिल निवासी गांव काले रोहतक, निरंजन निवासी आसान सांपला व सतीश निवासी गांव अलाल सांपला ने उसका अपहरण करके गैंगरेप किया।

निचली अदालत ने 16 जुलाई, 12 को दिए फैसले में सभी आरोपियों को रिहा करते हुए कहा कि मामला फर्जी है। महिला ने नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए व जब पैसे मांगे गए तो गैंगरेप के फर्जी मामले में फंसा दिया। महिला ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन यहां भी उसका झूठ पकड़ा गया।
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