पहले तो खुद को कुंवारी बताकर मंदिर में शादी की और फिर चार साल बाद पति पर दुष्कर्म का आरोप लगा दिया। मामले में तीन माह जेल में रहने के बाद आरोपी पति को अदालत से जमानत मिली है।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टीएस कश्यप ने दिलशाद कॉलोनी निवासी विशाल वासनिक को 7 अक्तूबर को जमानत दी। जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि पीड़िता ने दिलशाद से तीन बच्चे होने और तलाकशुदा होने की बात एफआईआर में छिपाई थी। उसने यह बात भी छिपाई कि आरोपी से 2010 में उसकी शादी हो चुकी है।
पेश मामले में पीड़िता ने सीमापुरी थाने में पति विशाल के खिलाफ 26 जून, 2014 को दुष्कर्म और रास्ता रोकने की धाराओं में मुकदमा दर्ज करवाया था। एफआईआर के मुताबिक, पीड़िता ने कहा कि आरोपी ने उसके बच्चों को उठाकर उसके पहले पति दिलशाद को देने का डर दिखाकर उसके साथ 19 और 22 जून 2014 को दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप था कि विशाल ने उससे 25,000 रुपये भी लिए और वापस नहीं किए।
जमानत याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता आरके चौधरी ने कहा कि पीड़िता के आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं। असल में वह आरोपी की पत्नी है और उसने 26 अप्रैल 2010 को अपना धर्म बदलकर हिंदू धर्म अपनाया था। इसी दिन आरोपी से उसने मंदिर में शादी भी की थी। इस दौरान उसने शादीशुदा होने और तीन बच्चों की मां होने की बात छिपाई। धर्म परिवर्तन के हलफनामे में भी उसने खुद को अविवाहित बताया था।
अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों के बाद पुलिस से जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। पुलिस ने जांच रिपोर्ट में कहा कि बचाव पक्ष की दलीलें सही हैं। उसके बाद अदालत ने कहा कि पीड़िता ने शादी के समय हलफनामा दिया था। उसने आरोपी से शादी की थी। ऐसे में दोनों के बीच शारीरिक संबंध होना लाजिमी है। मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस चार्जशीट पेश कर चुकी है। इसलिए आरोपी को जमानत प्रदान की जाती है।