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डेथ वारंट के बाद भी क्यों रोकी 'नर पिशाच' की फांसी?

Sat, 28 Jun 2014 02:14 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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चर्चित निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को डेथ वारंट जारी होने के बावजूद फांसी क्यों नहीं दी गई। शुक्रवार को सीबीआई विशेष न्यायाधीश ने जब डासना जेल प्रशासन से इसका जवाब मांगा तो कोर्ट में मौजूद डिप्टी जेलर कोई जवाब न दे सके।
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विशेष न्यायाधीश ने जवाब दाखिल करने के लिए जेल प्रशासन को 28 जून की तारीख नियत की है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा के अनुसार निठारी कांड के एक मामले में सुरेंद्र कोली को कोर्ट ने फरवरी 2009 में फांसी की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने भी इस सजा पर अपनी मोहर लगा दी थी। इसके बाद मई 2011 को तत्कालीन सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने सुरेंद्र कोली का डेथ वारंट जारी करते हुए उसे डासना जेल भिजवा दिया था।
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विशेष लोक अभियोजक के अनुसार निठारी के कुल 16 मामलों में से 5 मामलों में कोर्ट सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा दे चुकी है। डेथ वारंट के बावजूद अभी तक सुरेंद्र कोली को फांसी नहीं दी जा सकी है। इसी के चलते शुक्रवार को सीबीआई विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार गुप्ता ने जेल प्रशासन को तलब किया था।

कोर्ट में हाजिए हुए डिप्टी जेलर हरबंश लाल पांडेय से न्यायाधीश ने कहा कि कोली की फांसी रोकने संबंधी जेल प्रशासन के पास हाईकोर्ट-सुप्रीमकोर्ट का कोई आदेश है तो उसे कोर्ट में पेश किया जाए। जेल प्रशासन अब शनिवार को अपना जवाब कोर्ट में दाखिल करेगा।
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