नोएडा के कनावनी गांव में अभी हिंसा की चिंगारी थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार सुबह फायरिंग के बाद पुलिस छावनी में बदले गांव में दबंगों ने रात को ही ताबड़तोड़, फायरिंग, मारपीट और आरोपियों के एक स्कूल पर बुलडोजर चलवा दिए।
खौफनाक वारदात में दलितों और अन्य गांव वासियों को अपना मुंह न खोलने की धमकी भी दी है। हत्या में आरोपी दलित अपने परिवारों सहित गांव छोड़कर चले गए हैं।
बता दें कि दबंगों और दलितों के बीच 75 मिनट तक चली गोलीबारी के बाद कनावनी गांव छावनी में बदल दिया गया था।
पुलिस के सामने हुआ सब कुछ!
गांव में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद सोमवार देर रात 40 से 50 बंदूकधारियों और लठैतों ने सुभाष चंद्र सिद्धार्थ के सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल पर हमला कर दिया। इस दौरान करीब 25 राउंड फायरिंग कर खौफ का माहौल बनाया गया।
स्कूल और बगल में ही बनी बिल्डिंग मैटीरियल के ऑफिस व गोडाउन पर भी सो रहे गार्ड और लोगों से मारपीट कर उन्हें भगा दिया गया। स्कूल और बिल्डिंग मैटेरियल के गोडाउन ऑफिस पर जेसीबी चलवा दी।
आसपास रहने वालों ने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। इस दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने वारदात से पहले सभी गांववासियों को अपने दरवाजे बंद कर अंदर ही रहने की धमकी दी थी। पुलिस ने मामले में एक जेसीबी सहित तीन लोगों को हिरासत में लेकर मामले की लीपापोती की है।
जमीन को लेकर हुआ था विवाद
सोमवार को नोएडा में हुए इस खूनी संघर्ष में 22 वर्षीय युवक की जान चली गई थी जबकि 12 अन्य लोग घायल हो गए थे।
घटना के पीछे मुख्य वजह ग्राम समाज की एक जमीन को बताया जा रहा है। इसे लेकर कोर्ट में भी काफी दिनों तक केस चला। घटना से पहले दोनों पक्ष पंचायत के लिए इकट्ठा हुए थे।
अचानक विवाद बढ़ गया और एक पक्ष के लोगों ने लाठी, डंडे और असलहों से हमला बोल दिया।
गांव छोड़कर भागे दलित परिवार
कनावनी गांव में घरों में की गई तोड़फोड़ के बाद कई दलित परिवार गांव छोड़कर भाग गए हैं। दबंगों ने उनके किराएदारों को घर खाली करने की धमकी दी है।
मंगलवार को गांव में पीएसी तैनात रहने से स्थिति नियंत्रण में रही। संघर्ष में जान गवां चुके राहुल के घर के बाहर शोक जताने वालों का तांता लगा रहा। गांव में सोमवार सुबह जिन दलितों के घर पर तोड़फोड़ की गई थी, वहां पीएसी तैनात रही। दिन में सन्नाटा छाया रहा।
दबंगों के डर से 40 से 50 लोग गांव से भाग गए हैं। गांव में रहने वाले रिश्तेदार उनके टूटे घरों और बिखरे सामान को समय-समय पर देखने आ रहे हैं, ताकि चोरी न हो जाए।