अदालत ने 2001 मेें संसद पर हमला करने वाले आतंकियों के शव कब्र से निकालने की कोशिश करने के आरोपी दो लोगों को संदेह का लाभ देेते हुए बरी कर दिया। अदालत ने आपने फैसले में कहा अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ मामला साबित करने में नाकाम रहा है।
आरोप है कि दोनों कथित रूप से गिद्धों को खिलाने के लिए शवों को कब्र से निकाल रहे थे। मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अभिलाष मल्होत्रा ने आरोपी रघु और विजय शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए कहा कि यह साफ है कि अभियोजन पक्ष के गवाहों ने अदालत में विरोधाभासी बयान दिए हैं।
उन्होंने कहा अभियोजन पक्ष का स्वतंत्र गवाह आरोपियों की शिनाख्त के बिंदु पर मुकर गया। पुलिस अधिकारियों के बयान असंगत एवं विरोधाभासी थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार 13 दिसंबर 2001 में एक सूचना मिली थी कि संसद पर हमले के आरोपी आतंकियों के शव को कब्र से निकलने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने मौके से विजय व रघु व अन्य को गिरफ्तार किया था।