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खुलासा: ये है अबॉर्शन मशीन बेचने वाला इंटरनेशनल गैंग

Sat, 15 Feb 2014 09:36 PM IST
अमर उजाला, गुड़गांव
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गुड़गांव में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों का अवैध कारोबार करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह देश में इस प्रकार का पहला मामला है। साइनोफॉम प्राइवेट लि. कंपनी के वेयर हाउस से छापेमारी में 19 पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें बरामद की गईं हैं।
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पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यह कार्रवाई की। इस दौरान मशीनों का सौदा करने वाले दो व्यक्ति भी गिरफ्तार किए गए। कोर्ट ने शनिवार को इन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा है। गिरोह का खुलासा शनिवार को पुलिस कमिश्नर आलोक मित्तल और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के निदेशक राकेश गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया।

मित्तल ने बताया कि पिछले दिसंबर से ही पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन गिरोह को पकड़ने के लिए अभियान शुरू किया गया था। प्रदेश के विभिन्न स्थानों से मिली लीड की कड़ियों को जोड़ते हुए टीम आईएमटी मानेसर सेक्टर-4 के साइनोफॉम प्राइवेट लि. कंपनी के वेयर हाउस तक पहुंची।
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वहां नेशनल सेल्स मैनेजर सतनाम सिंह से मशीनों को खरीदने का सौदा किया गया। एक लाख 25 हजार में सौदा तय हुआ। पुलिस ने शुक्रवार को उसे मौके से ही रंगेहाथों पकड़ा। उसके साथ गौतम नाम का भी व्यक्ति गिरफ्तार हुआ है। पुलिस कमिश्नर आलोक मित्तल ने बताया कि मानेसर और दिल्ली निवासी हितेश भाटिया के कार्यालय से छापे के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। इसकी छानबीन की जा रही है। इससे कई और खुलासे हो सकते हैं।

एनएचआरएम के निदेशक राकेश गुप्ता ने बताया कि पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें बिना किसी बिल के अवैध तरीके से बेची जा रही थीं। खरीददार कौन है, इससे भी कंपनी का कोई लेना देना नहीं था। वहां से 19 पोर्टेबल मशीनें जब्त की गईं। यह सभी चीनी कंपनी कायसन से आयात की गईं थीं।

ऐसे हुआ गिरोह का खुलासा
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जींद में महिला को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए नकली कस्टमर बनाया। उसकी मदद से भिवानी के जमालपुर की कविता को अल्ट्रासाउंड करते रंगे हाथों पकड़ा गया। कविता सेंजेन कंपनी की छह बाई चार इंच की पोर्टेबल मशीन का गर्भपात में प्रयोग करती थी। पूछताछ के दौरान कविता ने बताया कि उसने यह मशीन कैथल के राजकुमार से खरीदी। राजकुमार ने बताया कि उसने दिल्ली निवासी हितेश भाटिया से इसे खरीदा। क्लासिक कंपनी का मालिक हितेश भाटिया सेंजेन कंपनी और कायसन कंपनी दोनों की अल्ट्रासाउंड मशीन आयात करके बेचता है। एफडीए की टीम ने भाटिया से मिली सूचना के आधार पर फर्जी ग्राहक बनकर मानेसर में सतनाम सिंह बैंस के साथ संपर्क साधकर मशीन खरीदने की फर्जी डील की। इसी में सतनाम सिंह पुलिस के हत्थे चढ़ा।

खतरनाक हैं मशीनें
एनआरएचएम के निदेशक राकेश गुप्ता ने बताया कि अवैध तरीके से बेची जा रही पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनें खतरनाक हैं। क्योंकि किसने किसको बेचा यह पता नहीं चलता। यहां पकड़ी गईं मशीनों में 17 नॉर्मल मशीनें हैं। दो कलर डापलर, 3डी और 4डी क्वालिटी वाली हैं। सिंजेन नाम की चाइनीज पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन मात्र चार इंच की हैं। इसे कोई भी कोट की जेब में रखकर ले जा सकता है।

भ्रूण हत्या का नया ट्रेंड
राकेश गुप्ता कहना है कि पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देने का नया ट्रेंड हैं। क्योंकि जो लोग पकड़े गए हैं, उसमें से एक का लाइसेंस 2009 और दूसरे का 2013 का है। गुप्ता ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इन मशीनों के कारण ही हरियाणा में लिंगानुपात डगमगा रहा है। इस मामले में हरियाणा का देश में 31वां स्थान है।

क्या है नियम
सीएमओ पुष्पा बिश्नोई ने बताया कि पीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड मशीन का आयात करना किसी भी लाइसेंसधारी के लिए गलत नहीं हैं। लेकिन मशीनों को बेचे जाने का पूरा ब्योरा और बिल उनके पास होना चाहिए। मशीनें बेचने की रिपोर्ट हर तीन महीने में स्वास्थ्य विभाग को देना जरूरी है।
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