ई-कॉमर्स कंपनी होमशॉप 18 के नाम पर ठगी करने वाले तीन आरोपियों को नोएडा पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी फर्जीवाड़े के लिए दिल्ली में दो कॉल सेंटर चलाते थे। इनमें 60-65 कर्मचारी थे। आरोपी लॉटरी निकलने और आकर्षक ऑफर का झांसा देकर लोगों को ठगते थे। ज्यादा से ज्यादा लोगों को शिकार बनाने के लिए इन्होंने 20 लड़कियों को बतौर टेलीकॉलर रखा था। इनके द्वारा किए गए फर्जीवाड़े के एक मामले में थाना सेक्टर-20 में एफआईआर दर्ज थी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान छाबड़ा कॉलोनी शालीमार गार्डन, गाजियाबाद निवासी राहुल सिंघानिया, इचाक हजारीबाग निवासी राजकुमार और संतोषगण ऊना, हिमाचल प्रदेश निवासी तेजपाल के रूप में हुई। राहुल गिरोह का मास्टर माइंड और फर्जी कॉल सेंटर का संचालक है। डीयू से बीकॉम कर चुका राहुल वर्ष 2014 में सूरजपुर थाने से धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जा चुका है। राजकुमार फिलहाल शास्त्री पार्क उस्मानपुर दिल्ली और तेजपाल गणेश नगर दिल्ली में रह रहा था।
एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि राहुल सिंघानिया ने दिल्ली के राजा गार्डन में फर्जी कॉल सेंटर खोल रखा था। कॉल सेंटर क्रेडिट कार्ड बनाने की आड़ में चलाया जा रहा था। छापेमारी के दौरान इनके कॉल सेंटर से तीन हार्ड डिस्क, 28 मोबाइल, 77 सिम कार्ड, 15 डेबिट व क्रेडिट कार्ड, दो पैन कार्ड और दो ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए। मामले में फिल्म सिटी स्थित होमशॉप 18 कंपनी की तरफ से ही थाना सेक्टर-20 में उसके नाम से फर्जीवाड़ा करने की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। कंपनी ने बताया कि आरोपी उनके नाम पर ऑर्डर बुक कर भुगतान ले रहे हैं। जब लोगों के पास सामान नहीं पहुंच रहा, तो उनके कस्टमर केयर पर लोग शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
कंपनी का पूर्व कर्मचारी दे रहा था डाटा
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी होमशॉप 18 के ग्राहकों को ही फोन करते थे। कंपनी का एक पूर्व कर्मचारी राघव आरोपियों को ग्राहकों का डाटा उपलब्ध कराता था। इसके बाद फर्जी कॉल सेंटर में तैनात टेलीकॉलर लोगों को चार हजार रुपये की शॉपिंग करने पर आकर्षक गिफ्ट देने का झांसा देकर जाल में फंसाते थे। पीड़ितों से ये लोग पेटीएम वॉलेट में पैसा ट्रांसफर कराते थे। आरोपियों के लगभग 35 पेटीएम वॉलेट की भी जानकारी मिली है, जो बिना केवाईसी के बने थे। बिना केवाईसी के इन वॉलेट में 15 हजार रुपये ही रख सकते थे। 15000 रुपये वॉलेट में जमा होते ही आरोपी उस पैसे को अपने चार बैंक खातों में ट्रांसफर कर उस सिमकार्ड को तोड़ देते थे। छह माह में आरोपियों के बैंक खातों में लगभग 35 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन हो चुका है।