ज्योति की मौत के मामले में विजयनगर पुलिस ने शनिवार को हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली। रिपोर्ट में दो महिलाओं समेत तीन को नामजद किया गया है। नामजद आरोपी खैरून, मैहरून और राजू भागे हुए हैं। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है।
दूसरी तरफ, शराब तस्करों और सट्टेबाजों के खिलाफ अभियान चलाने वाली गाजियाबाद की ‘मलाला’ यानि ज्योति के परिजन ही नहीं, उसकी टीचर और मुहल्लेवाले भी बेहद गमजदा हैं।
परिजनों का आरोप है कि अगर पुलिस शिकायतों पर कार्रवाई करती तो उनकी बेटी जिंदा होती। 21 जुलाई 2014 को उन्होंने एसएसपी से भी शिकायत की थी।
कप्तान के जांच के निर्देशों के बावजूद विजयनगर पुलिस ने छानबीन करने तक की जहमत नहीं उठाई। बकौल परिजन, शराब तस्करों के खिलाफ ज्योति ने पहले सितंबर 2013 में शिकायत की थी।
इसके बाद उसके परिवार के साथ मारपीट की गई। परिजनों के मना करने के बावजूद ज्योति ने बिना डरे फिर दिसंबर 2013 और मार्च 2014 में शिकायत की। इस बार पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
मगर वह जल्द ही जेल से छूटकर आ गया। आरोपी ने फिर उनके साथ मारपीट की। 21 जुलाई को इसकी एसएसपी से शिकायत की गई थी। धमकियों के बावजूद ज्योति बेखौफ थी। वह आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना चाहती थी, ताकि शराब तस्करों की वजह से माहौल खराब न हो।