साहा निवासी दुराचार की पीड़िता को शनिवार को अदालत ने गर्भपात कराने की इजाजत नहीं दी। ये नाबालिग किशोरी साढ़े चार माह से गर्भवती है। अदालत ने मेडिकल ग्राउंड पर पीड़िता को गर्भपात की अनुमति देने से इंकार कर दिया है जबकि पीड़िता के अनुसार वे इसके लिए अब हाईकोर्ट में गुहार लगाएगी।
जानकारी के अनुसार साहा की ही एक महिला ने पीड़िता को करनाल के मथाना गांव के एक व्यक्ति से मिलवाया था। धीरे-धीरे दोनों में प्रेम हो गया। इसी प्रेम प्रसंग के चलते मथाना का युवक साहा की नाबालिग किशोरी को शादी का झांसा देकर भगा ले गया। युवक ने पहले तो कुछ दिन किशोरी को अपने साथ अलग-अलग शहरों में होटलों में रखा।
बाद में एक गुरुद्वारे में जाकर किशोरी की उम्र ज्यादा बताकर शादी कर ली। अप्रैल, 2014 में आरोपी युवक ने हाईकोर्ट में नाबालिग की उम्र गलत बताकर हाईकोर्ट से प्रोटेक्शन ले ली और फिर अपने गांव मथाना में नाबालिग को ले गया। वहां उसने अप्रैल से जुलाई तक नाबालिग को अपने साथ रखा और उसके साथ दुराचार किया।
उधर, किशोरी के परिजनों ने पुलिस को किशोरी के नाबालिग होने के सारे सुबूत दे दिए। इसके बाद पुलिस ने करनाल के मथाना गांव में जाकर युवक, उसके परिजनों व नाबालिग को हिरासत में ले लिया। बाद में मालूम चला कि नाबालिग किशोरी साढ़े चार माह की गर्भवती है।
इसी के चलते नाबालिग ने जिला अदालत से गुहार लगाई थी कि वे बच्चा नहीं चाहती है, क्योंकि वे इस वक्त बच्चे की देखरेख करने के काबिल नहीं हैं, इसीलिए उसे गर्भपात कराने की अनुमति दी जाए लेकिन जिला अदालत ने इस मामले में कई पहलुओं पर गौर करते हुए मेडिकल ग्राउंड पर फिलहाल पीड़िता की याचिका को खारिज कर दिया है। पीड़िता अब गर्भपात के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।