लोनी के इंद्रापुरी में बीते नवंबर में हुई 27 वर्षीय बेटे की हत्या उसकी मां ने दूसरे बेटे के साथ मिलकर कराई थी। वह कई साल से मां और अपनी भाभी के साथ अवैध संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था।
शराब के नशे में उनसे जबरदस्ती करता था। पुलिस ने आरोपी मां-बेटे और उनके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि हत्या करने वाला मुख्य आरोपी अभी फरार है।
सीओ बार्डर अरविंद यादव ने बताया कि 17 नवंबर 2013 को इंद्रापुरी निवासी आशीष गर्ग(27) की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। उसका शव 19 नवंबर को गजरौला के जंगलों में मिला था।
किसी भी दोस्त अथवा अन्य जानकार का हत्या से सुराग नहीं मिलने पर पुलिस ने भाई अतुल से सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि आशीष शराब पीता था। पांच साल पहले पिता विनय दिमाग की नस फटने के बाद कोमा में चले गए थे।
इसके बाद से ही आशीष अपनी मां और भाभी के साथ अवैध संबंध बनाने की कोशिश कर रहा था। मौका मिलते ही वह उनके साथ जबरदस्ती करने लगता था। परेशान मां ने हत्या से करीब तीन माह पहले अपने बड़े बेटे अतुल को आशीष की हरकतों के बारे में बताया।
अनीता और अतुल उसकी शराब छुड़ाने के लिए खुद को आयुर्वेदिक डॉक्टर बताने वाले शकील तांत्रिक से मिले। शकील ने शराब छुड़वाने की दवा नहीं होने की बात कहकर नोएडा के जेवर निवासी राजवीर से संपर्क कर आशीष की हत्या कराने की सलाह दी।
राजवीर के साथ मिलकर उन्हाेंने 30 हजार रुपये सुपारी देकर आशीष की हत्या की साजिश रच डाली। राजवीर 17 नवंबर को शराब पिलाने के बहाने उसे गजरौला के एक फार्महाउस पर ले गया। जहां चौकीदार हरिओम के साथ मिलकर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।
पुलिस ने मां, भाई अतुल, शकील तांत्रिक और हरिओम चौकीदार को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि मुख्य आरोपी राजवीर काना फरार है।
मोबाइल ने खोले राज
कलयुगी बेटे और हत्यारी मां व भाई का सच आरोपी अतुल की मोबाइल लोकेशन ने खोल दिया। दरअसल, जांच में किसी भी दोस्त अथवा दुश्मन का सुराग नहीं मिलने पुलिस ने जब परिवार के लोगों के ही मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लिया।
पता चला कि जिस दिन आशीष गायब हुआ था उस दिन अतुल की मोबाइल लोकेशन वहीं थी, जहां से आशीष की लाश मिली। पुलिस ने जब यह बात अतुल को बताई तो उसने राज खोल दिए।
ध्यान भटकाने को दर्ज कराई गुमशुदगी
पुलिस उन पर शक न करे इसके लिए अतुल ने 21 नवंबर को अपने भाई की गुमशुदगी लोनी थाने में दर्ज कराई थी। इतना ही नहीं पुलिस को भाई का शव मिलने की सूचना भी उन्हाेंने ही दी थी।
अतुल ने अखबारों के माध्यम से उन्हें यह सूचना मिलने की बात कही थी। मगर इसके बाद परिवार के किसी भी सदस्य ने पुलिस से आकर केस के बारे में पूछताछ नहीं की। जिससे पुलिस का शक परिवार की ओर बढ़ गया।