100 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में दिल्ली पुलिस के एक सिपाही के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मामला मंगलवार की शाम को गोविंदपुरी थाने में दर्ज हुआ, जहां पर सिपाही की तैनाती है। मामला दर्ज होने के बाद सिपाही गायब हो गया है। बुधवार को सिपाही रामकेश को निलंबित कर दिया गया।
दरअसल बकरीद से पूर्व तुगलकाबाद किले के पास बकरा बाजार लगी थी। इस जगह पर बाजार के लिए एमसीडी ने लाइसेंस जारी नहीं किया है। इस मार्केट में यूपी के कई इलाकों से बकरा व्यापारी पहुंचे थे। इसी मार्केट में एक व्यवसायी से सिपाही रामकेश 100 रुपये की रिश्वत ले रहा था।
दस-दस के दस नोट थे। रिश्वत की रकम कम भी हो सकती है। किसी ने सिपाही को पैसे लेते हुए वीडियो बना ली। इसके बाद वीडियो को जिले के सीनियर पुलिस अधिकारी को सौंप दिया। मामला दक्षिण रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त के पास पहुंचा तो उन्होंने सिपाही के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
100 रुपये की रिश्वत लेने का ये मामला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। दक्षिण-पूर्व जिले के उपायुक्त मंदीप सिंह रंधावा अन्य सीनियर पुलिस अधिकारियों के साथ बुधवार को गोविंदपुरी थाने पहुंचे और थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को रिश्वत न लेने की नसीहत दी। उन्होंने थाने में तैनात पुलिस स्टाफ को ब्रीफिंग के लिए एकत्रित किया। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज की जांच की जा रही है। उसके बाद ही सिपाही के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निगम के चार अफसरों को कैद
अदालत ने भ्रष्टाचार के आरोप में नगर निगम के चार अधिकारियों को तीन-तीन वर्ष कैद सहित 15-15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इन पर अवैध निर्माण के संबंध में रिपोर्ट दाखिल न करने की एवज में रिश्वत लेने का आरोप था।
अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार तेजी से फैल रहा है जो गंभीर अपराध है। ऐसे में आरोपियों को कड़ी सजा देना जरूरी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरोत्तम कौशल ने हाल ही में दिए फैसले में एमसीडी के स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी (जेजे) विभाग के अधिकारी सुरेश, दिलबाग सिंह, हेमंत कुमार व उमेद सिंह कानूनगो को सजा सुनाई है।
आरोपियों ने अवैध निर्माण के खिलाफ रिपोर्ट न देने पर 10 से 20 हजार रुपये रिश्वत मांगी थी, लेकिन बाद में चार हजार में सौदा तय कर लिया। अदालत ने कहा कि सभी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र रचने व भ्रष्टाचार के तहत ठोस साक्ष्य हैं। अभियोजन पक्ष बिना शक अपराध साबित करने में सफल रहा है।
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता देवेंद्र सिंह ने 8 अक्तूबर 2008 को चारों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी कि उनके पिता ने अवैध निर्माण किया है और यदि रिश्वत नहीं दी गई तो मकान तोड़ दिया जाएगा। विभाग अधिकारियों ने 6 नवंबर 2008 को चार हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था।