दक्षिण-पश्चिमी जिले के नारायणा थाना इलाके में प्रथम श्रेणी में पास होने पर भी 12वीं कक्षा के छात्र ने शनिवार दोपहर को फांसी लगा ली। छात्र को और अच्छे अंक आने की उम्मीद थी। वह आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहता था। सपना खत्म होता देखकर छात्र ने ये कदम उठाया है।
हालांकि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। नारायणा थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए डीडीयू अस्पताल भेजा है। दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि अनुज कुमार अपने परिवार के साथ डब्ल्यूजैड, नारायणा गांव में रहते हैं। वह किराने की दुकान चलाते हैं।
अनुज की पत्नी शनिवार सुबह अपने परिजनों से मिलने गई थी। अनुज अपनी दुकान पर थे और उनका बेटा विद्याराज(17) घर पर अकेला था। करीब 12 बजे जब अनुज की पत्नी ने बेटे का रिजल्ट जानने के लिए फोन किया तो उसने फोन नहीं उठाया।
अनुज ने इसकी सूचना पड़ोसियों को दी। पड़ोसियों ने देखा कि विद्याराज ने बेल्ट से फांसी लगा रखी है। फांसी के फंदे से उतारकर उसे पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार विद्याराज के12वीं में 60 फीसदी अंक आए थे।
वह नारायणा गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ता था। परिजनों का कहना है कि वह डॉक्टर बनना चाहता था। शायद उसे लगा कि 60 फीसदी अंकों में उसका बायोलॉजी में दाखिला नहीं हो पाएगा। इस कारण उसने खुदकुशी जैसा कदम उठा लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।