दुष्कर्म की पीड़िता के गर्भ में पल रहे बच्चे व आरोपी के डीएनए का मिलान न होने के मद्देनजर विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया है।
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आरोपी पर सोलह वर्षीय पीड़िता से दुष्कर्म का आरोप था। द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने डीएनए सैंपल जांच की निगेटिव रिपोर्ट के आधार पर आरोपी को बरी करते हुए कहा कि पीड़िता के गर्भ में पल रहा बच्चा आरोपी का नहीं है।
इस वजह से अब यह तय करना मुश्किल हो गया है कि युवती के गर्भ में पल रहे बच्चे का पिता कौन है।
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डाबड़ी पुलिस ने पीड़िता की मां की शिकायत पर आरोपी को जनवरी 2013 में गिरफ्तार किया था। उसका आरोप था कि उसके मकान मालिक ने उसकी बेटी को तीन नवंबर 2011 को अगवा कर उससे दुष्कर्म किया।