वह बिहार के मुन्ना मिश्रा, शक्ति सिंह, राजकुमार, प्रदीप और नीरज के साथ डकैती, रंगदारी वसूली और हत्या की वारदात करता था। वर्ष 2002 में आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार हुआ। जेल से लौटकर वह सऊदी अरब वेल्डर का काम करने चला गया।
वर्ष 2007 में लौटकर वह मुन्ना मिश्रा के गिरोह में शामिल हो गया। कुछ दिन उसके साथ काम कर वह मिंटू सिंह के गिरोह में चला गया। मिंटू सिंह से वह मोतिहारी जेल में मिला था। उसने रंजिश के चलते पूर्व सरकारी वकील त्रिपुरारी शरण शर्मा की गोपालगंज टाउन में 30 अगस्त, 2015 को दिनदहाड़े चैंबर में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
इस मामले में कोर्ट से भगोड़ा घोषित होने के बाद वह मुंबई चला गया और दो वर्ष छिपकर रिश्तेदार के यहां रहा। इसके बाद वह दिल्ली छिपने आ गया था।