निवाड़ी में शूट आउट के दौरान घायल हुए सिपाही अनिल चौधरी की हालत गंभीर है। वह यशोदा अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। रविवार को डॉक्टर उसके पैर का ऑपरेशन करेंगे।
सिपाही अनिल ने बताया कि बदमाशों को जिंदा पकड़ने के प्रयास में उसे गोली लगी। बदमाशों के पकडे़ जाने पर कई वारदातों का खुलासा होने की उम्मीद थी।
ऐसे में वह उन्हें मारना नहीं बल्कि जिंदा पकड़ना चाहता था। उसने बदमाशों को सीधे गोली नहीं मारी और बदमाशों ने फायर कर दिया। गोली लगने के दौरान वह अकेला था।
परिजनों और पुलिस अधिकारियों ने सिपाही की बहादुरी की सराहना की। अनिल के भाई संजय चौधरी और ससुर ने कहा कि अकेले होने के बावजूद अनिल के बदमाशों का डटकर मुकाबला करना प्रशंसनीय है।
शनिवार को एसएसपी धर्मेंद्र सिंह और एसपी सिटी डॉ. अजयपाल ने अस्पताल पहुंचकर घायल सिपाही से मुलाकात की। शासन स्तर से हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
बिजनौर के माछकी गांव के रहने वाले अनिल के पिता महावीर सिंह जमींदार हैं। अनिल चार भाई है, बड़ा भाई ओंकेश जमींदार है। कुलवीर डॉक्टर है, संजय देहरादून में नौकरी करते हैं। अनिल परिवार में इकलौता पुलिसकर्मी है।
वह पत्नी मोनिका और ढाई साल के बेटे अर्शित के साथ मोदीनगर में रहते हैं। उधर, लूट के मास्टर माइंड ‘डॉक्टर’ और शूट आउट के दौरान भागे चौथे बदमाश की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
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मेरठ-गाजियाबाद पुलिस में ठनी
निवाड़ी में शूट आउट के दौरान मेरठ पुलिस एक आरोपी विकास जाट को पकड़कर मेरठ ले गई और परीक्षित गढ़ में हुए एक हत्याकांड का खुलासा करने का दावा किया। विकास को गाजियाबाद पुलिस ने पकड़ा था।
सूत्रों का कहना है कि मेरठ पुलिस की इस हरकत पर गाजियाबाद पुलिस ने नाराजगी जाहिर की है। मामला शासन स्तर तक पहुंच गया है। हालांकि पुलिस अधिकारी खुल कर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
पुलिस सूत्रों की मानें तो मेरठ जिले के कुछ पुलिसकर्मी इस शूट आउट में अपनी भूमिका बताकर बदमाश को पकड़ने का दावा कर रहे हैं।