एमबीबीएस में 25 लाख रुपये में कहीं भी एडमिशन कराने के नाम पर स्टूडेंट्स से करोड़ों की ठगी करने वाले ठगों को 36 हजार रुपये का लालच ले डूबा।
ठगों ने बुलंदशहर में रहने वाले अर्जुन को फोन करके अपने जाल में फंसाना चाहा, लेकिन इससे पहले कि अर्जुन ठगी का शिकार बनता, पुलिस के साइबर एक्सपर्ट उस तक पहुंच गए।
अर्जुन ने बताया कि उसे एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के लिए फोन आया है। ठगों ने एडमीशन कराने की एवज में 25 लाख की डिमांड की है। 15 अक्तूबर को उसे झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज का भ्रमण भी करा दिया गया।
अब ठगों ने 36 हजार का डीडी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के नाम बनवाकर उन्हें देने की बात कही है। रविवार को यह डीडी ठगों को देना था।
इसके लिए उन्होंने अर्जुन को झांसी बुलाया था, मगर पुलिस की योजना के तहत अर्जुन ने ठगों को ही मोदीनगर स्थित एसआरएम यूनिवर्सिटी के पास बुलाया था।
मास्टरमाइंड है रजनीश: नोएडा में खोला था कॉल सेंटर
इंस्पेक्टर दीपक शर्मा के अनुसार रजनीश तिवारी रैकेट का मास्टर माइंड है। एमसीए करने के बाद रजनीश ने दिल्ली लक्ष्मीनगर में डेढ़ साल वेबसाइट डेवलपमेंट पर काम किया।
इसके बाद जनकपुरी दिल्ली में इंको सर्विसेज साफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम किया। कानपुर निवासी दिलीप से उसने फर्जी मार्कशीट तैयार करने और एमबीबीएस में एडमीशन के नाम पर ठगी का गुर सीखा।
उसने अपने गैंग में ब्रजेश को शामिल किया। दोनों ने नोएडा सेक्टर तीन में बाला एजुकेशन गाइडलाइंस के नाम से कॉल सेंटर खोला।
असफल स्टूडेंट्स का डाटा करते थे एकत्र
सीओ राजेश सिंह के अनुसार ठग पहले एमबीबीएस में एडमिशन नहीं पाने वाले स्टूडेंट्स का डाटा एकत्र करते थे। इसके बाद कॉल सेंटर खोलकर भारी संख्या में अच्छी आवाज वाले लड़के लड़कियों को चार से पांच हजार रुपये महीने पर रखा जाता था।
यह स्टाफ स्टूडेंट्स को फोन करके एडमिशन दिलाने की बात कहता था। स्टूडेंट्स से मुलाकात को फाइव स्टार होटल में कमरा बुक किया जाता था। दूसरे राज्य निवासी व्यक्ति का वोटर आईकार्ड डाउनलोड कर उस पर अपना फोटो लगा देते थे।