दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) में कार्यरत कंडक्टर की आकस्मिक मौत होने पर बृहस्पतिवार को हरियाणा रोडवेज के फरीदाबाद डिपो में चक्का जाम रहा। कर्मचारियों ने कंडक्टर की मौत का कारण आईएसबीटी में तैनात अधिकारियों द्वारा की गई बदसलूकी बताया।
आरोप है कि कंडक्टर के कपड़े उतरवाकर तीन बार तलाशी ली गई, जिससे उसे हार्टअटैक हो गया। चक्का जाम की वजह से शाम 5:30 बजे तक बस संचालन ठप रहा और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 9:30 बजे कंडक्टर सुंदर की मौत की खबर बस डिपो पहुंची।
खबर फैलते ही कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार कर करीब 9:50 बजे डिपो परिसर में धरना शुरू कर दिया। रोडवेज कर्मचारी नेता राजसिंह सौरोत, रामआसरे, जितेंद्र धनकड़, रविंद्र नागर, जयसिंह गिल, राजसिंह सौरोत, शहजाद खान, जयपाल राठी, सुरेश सिंह, रणवीर सिंह की अगुवाई में रोडवेज कर्मचारी धरने पर बैठ गए।
इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार और रोडवेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। रोडवेज ड्राइवर और कंडक्टर भी बसों को खड़ा कर धरने में शामिल हो गए। हालांकि तब तक डिपो से 20 बस चंडीगढ़, गुड़गांव सहित लंबी दूर के लिए रवाना हो चुकी थीं, लेकिन इसके बाद सभी बसें डिपो में खड़ी रहीं।
लोकल रूटों पर बस संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ। यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। यूपी रोडवेज, राजस्थान रोडवेज और डीटीसी की बसों में पैर रखने की जगह भी नहीं थी। यात्रियों को मेट्रो, ट्रेनों और डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
हड़ताल की घोषणा होते ही रोडवेज कर्मचारियों ने तुरंत डिपो पर एकत्र होकर बसों को बंद करा दिया। उस समय प्रदेश के रोहतक, भिवानी, रेवाड़ी, सोहना जाने वाली बसों में यात्री बैठ रहे थे। कर्मचारियों ने बसों में बैठे सभी यात्रियों को बसों से नीचे उतार दिया।
11 लाख का हुआ नुकसान
बस सेवा की रफ्तार बृहस्पतिवार को थम गई। बल्लभगढ़ डिपो में 160 सिटी बसें तथा 180 सामान्य बसें हैं। इनमें से केवल 15 से 20 सामान्य बसें ही बृहस्पतिवार को चल सकीं। जबकि सभी सिटी बसें डिपो में ही खड़ी रहीं। बसों का चक्का जाम होने से रोडवेज को 11 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।