हाईकोर्ट ने यौन शोषण मामले में आरोपी एवं टेरी के कार्यकारी उपाध्यक्ष पर्यावरणविद् आरके पचौरी को राहत प्रदान कर दी। अदालत ने कथित पीड़िता के उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसमें पचौरी को मिली अग्रिम जमानत को रद्द करने का आग्रह किया था।
पीड़ित महिला टेरी में ही कार्यरत थी। न्यायमूर्ति एसपी गर्ग ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निचली अदालत ने 21 मार्च 2015 को पुलिस द्वारा पेश दस्तावेज व साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन करने पर ही पचौरी को अग्रिम जमानत दी थी।
ऐसे में वे समझते हैं कि इस फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता (महिला) के वकील यह बताने में असफल रहे कि वर्तमान में पचौरी को हिरासत में लेकर पूछताछ की क्या जरूरत है।
पचौरी को अग्रिम जमानत प्रदान करने के दौरान पीड़ित महिला व जांच एजेंसी के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है। इसके अलावा आरोपी पर कठोर शर्तें लगाई गई है।
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में पचौरी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया है। आरोप पत्र में करीब 23 गवाहों की सूची के अलावा कई एसएमएस, ई-मेल को पेश किया गया है।
अदालत ने कहा कि शिकायत की प्रमाणिकता और असलियत जांच व ट्रायल के दौरान सामने आएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस बात पर विचार नहीं किया जा सकता कि आरोपी पचौरी ने जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया है और वह अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है।