दिल्ली की एक कोर्ट ने लिवइन रिलेशन में रहने वाली अपनी पार्टनर से रेप करने के मामले में एमबीए के छात्र को सात साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने साथी युवती को विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए लेकिन बाद में शादी से मुकर गया।
अदालत ने कहा कि हमारे समाज में जब कोई महिला पुरुष के साथ रहती है तो वह समझती है कि पुरुष उससे विवाह करेगा, यदि वह ऐसा नहीं करता तो यह रेप है।
साकेत स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश योगेश खन्ना ने अपने फैसले में कहा लिवइन रिलेशन जैसे रिश्ते अचानक खत्म नहीं हो जाते। महिला के लिए यह काफी मायने रखता है कि जिससे वह शारीरिक संबंध बना रही है वह उससे विवाह करेगा। उन्होंने कहा कि आरोपी ने पार्टनर के गर्भवती होने पर उसे गर्भपात के लिए भी मजबूर किया।
अदालत ने कहा कि सभी साक्ष्यों व गवाहों के बयानों को देखने व अपराध की गंभीरता को देखते हुए वे आरोपी को रेप के आरोप में सात वर्ष कैद की सजा सुनाई जाती है। इतना ही नहीं अदालत ने आरोपी पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी किया है। अदालत ने फैसले की प्रति दिल्ली कानूनी सहायता अथॉरिटी को भेजते हुए एलएलबी की पीड़ित छात्रा को तय कानून के तहत उचित मुआवजा प्रदान करने का निर्देश दिया है।
यूपी निवासी हरी मोहन शर्मा के उसकी पार्टनर ने अगस्त 2011 में शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने आरोप लगाया था कि वह आरोपी के साथ लिवइन में रह रही थी। आरोपी ने उससे विवाह का वादा कर दिसंबर 2010 से जनवरी 2011 के बीच कई बार शारीरिक संबंध बनाए। उसने कहा जब वह गर्भवती हो गई तो उससे विवाह से इंकार कर दिया व जबरन गर्भपात करवाया।