9 सितंबर को खुद पुलिस आयुक्त संदीप खिरवार ने पत्रकारवार्ता कर अशोक के वारदात को अंजाम दिए जाने का दावा भी किया। उसके खिलाफ पुख्ता सबूत होने की बात कही।
गुरुग्राम पुलिस की बताई गई थ्योरी पर न तो प्रिंस के परिजनों और न ही आरोपी बस कंडक्टर अशोक के परिजनों को विश्वास हुआ। पीड़ित व आरोपी पक्ष ने सीबीआई जांच की मांग की।
इसके बाद मामला सीबीआई के अधीन चला गया। सीबीआई ने गुरुग्राम पुलिस की थ्योरी को झूठा साबित करते हुए 7 नवंबर को विद्यालय के 11वीं कक्षा के छात्र को हिरासत में लिया।
इसके बाद से ही पुलिस की नींद उड़ गई। इस मामले में सीबीआई ने गुरुग्राम पुलिस के जांच अधिकारियों से भी पूछताछ की। पुलिस ने खुफिया तंत्रों को सक्रिय कर मामले में पैनी नजर रखने को कहा।
सोमवार सुबह से ही पुलिस के खुफिया तंत्र अदालत परिसर में सक्रिय रहे। सीबीआई की हर गतिविधि की जानकारी पुलिस को दी जाती रही।
सूत्रों की मानें तो चार्जशीट दाखिल होने व छात्र के खिलाफ सीबीआई द्वारा पुख्ता सबूत होने का दावा करते ही पुलिस के आला अधिकारियों की नींद उड़ गई।
हालांकि अभी सीबीआई ने पार्ट चार्जशीट दाखिल की है। सूत्रों की मानें तो सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पुलिस के उन अधिकारियों के नाम भी शामिल हो सकते हैं, जिन्होंने मामले की जांच में लापरवाही बरती और जल्दबाजी में बस कंडक्टर अशोक को आरोपी बनाकर वाहवाही लूटी।
उधर, सीबीआई की जांच में स्कूल की लापरवाही की भी जांच की जा रही है। सूत्रों की मानें तो चार्जशीट में यह भी शामिल हो सकता है कि वारदात के बाद खून के धब्बे किसके निर्देश पर साफ किए गए।