गौरतलब है कि दिसंबर 2017 में 16 वर्षीय आरोपी छात्र को जमानत नहीं देने के किशोर न्याय बोर्ड के फैसले को चुनौती देने वाली आरोपी की याचिका पर सुनवाई होनी थी, लेकिन नाबालिग आरोपी की जमानत याचिका का सीबीआई द्वारा विरोध करने पर सुनवाई 6 जनवरी तक स्थगित कर दी गई थी।
बता दें कि गुड़गांव स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में आठ सितंबर को दूसरी कक्षा के छात्र प्रद्युम्न ठाकुर की हत्या करने के आरोपी 11वीं कक्षा के छात्र की जमानत अर्जी को बोर्ड पहले ही खारिज कर चुका है।
बता दें कि आरोपी छात्र के वकिल ने कहा कि उनको बाल न्याय कानून के तहत चार्जशीट और जरूरी कागजात एक माह में मिलने थे जो कि सीबीआई ने नहीं दिए। कोर्ट ने यह कहा कि आरोपी छात्र जब तक 21 साल का नही हो जाता वह अपने घर में ही रहेगा। जब वह २१ वर्ष का हो जाएगा तब कोर्ट इस बात पर चर्चा करेगा कि आरोपी छात्र को जेल भेजा जाए या जमानत दी जाए।
आरोपी छात्र के वकील ने आरोप लगाया था कि सीबीआई ने आरोपी पक्ष को जरूरी कागजात नही दिए, इसके खिलाफ सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पहले ही सारे दस्तावेज दिए जा चुके हैं और आरोपी पक्ष की ओर सेे कोई जरूरी दस्तावेज नही मंगे गए थे और न ही कोर्ट ने कोई डायरेक्शन पास किया था।
बता दें कि गुडग़ांव पुलिस ने पहले हीे कहा था कि कंडक्टर अशोक ही मुख्य आरोपी है मगर बाद में एजेंसी ने आरोपी छात्र को हत्या का दोषी करार दिया और इस हत्या के पीछे का कारण यह बताया कि आरोपी छात्र पेरेंट्स मीटिंग और स्कूल की परीक्षा रोकना चाहता था इसलिए उसने यह हत्या की।
वरुण ठाकुर के वकील सुशील टेकरीवाल ने कहा, जमानत याचिका अभी प्रीमचोयर स्टेज में है और केस पूरा हो चुका है। बाल न्याय बोर्ड ने 20 दिसंबर को आरोपी छात्र को बालिक करार दिया जिसके पूर्व ही अदालत ने यह घोषित कर दिया था कि छात्र ने प्रद्युम्न की हत्या अपने पूरे होशोअवाज में की थी।
मालूम हो कि बोर्ड ने पहले ही जमानत याचिका खारिज कर दी थी और इस केस की देखरेख के लिए एक पैनल का भी गठन किया था। बता दें कि बाल न्याय कानून के तहत जो भी आरोपी 16 से 18 साल का होगा उसने हत्या, चोरी, जैसे अपराध किए हैं उसे सात साल की जेल हो सकती है।