बिजली विभाग में भी अब कारपोरेट कंपनियों की तरह अफसर से लेकर इंजीनियरों तक टारगेट फिक्स किए जाएंगे। जो अफसर अपना कार्य जिम्मेदारी और लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएंगे वह विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
यह निर्णय मेरठ में हुई बिजली अफसरों की बैठक में लिए गए। इस बार सभी जिलों को बिजली चोरी, नए कनेक्शन और राजस्व वसूली करने का ही लक्ष्य दिया गया है।
दरअसल,पिछले सप्ताह मेरठ में विद्युत विभाग के अफसरों की बैठक हुई थी। इसमें मेरठ और सहारनपुर मंडल के विद्युत अफसर शामिल हुए थे। इसमें अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता और एसडीओ स्तर के अफसरों को बुलाया गया था।
मैनेजिंग डायरेक्टर(एमडी) ने दोनों मंडल के अफसर को साफ-साफ चेताया और कहा कि उन्हें सब पता है कहां से बिजली चोरी होती है और कहां से राजस्व वसूली को प्रभावित कराया जा रहा है।
एमडी ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि प्रत्येक जिले में अधीक्षण अभियंता जेई की जिम्मेदारी तय करें। इसमें बिजली चोरी रोकने, बकायेदारों के कनेक्शन काटने और नए कनेक्शन देने का लक्ष्य दिया जाए।
जो जेई यह काम पूरा नहीं कर पाए या लक्ष्य को अधूरा छोड़ दे उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग सरकारी जरूर है लेकिन अब हीला-हवाली नहीं चलेगी।
उन्होंने कहा कि बिजली विभाग को कारपोरेट कंपनी की तरह चलाना होगा और जो लोग अपने काम को पूरा नहीं कर पाएंगे वह कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
क्या कहते हैं अफसर
अधीक्षण अभियंता मुकुल सिंघल ने बताया कि गौतमबुद्घनगर में सबसे बड़ी समस्या बिजली चोरी की मानी गई है। इसे रोकने की जिम्मेदारी जेई को दी गई है। चोरी रोकने के बाद राजस्व वसूली और फिर नए कनेक्शन देने पर अब जोर रहेगा।
एसई ने बताया कि ऐसे लोग भी निशाने पर होंगे जिनके घर में 20 यूनिट तक बिल आ रहा है। उनके मीटर चैक होंगे और मीटर रीडरों द्वारा किए गए कार्य पर भी गंभीरता से नजर रखी जाएगी। अरग वह गलत काम करते हुए पाएं गए तो उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई कराई जाएगी।