गुरुग्राम का बस स्टैंड शाम होते ही अंधेरे के आगोश में चला जाता है। अगर दिन ढलने के बाद किसी को बस पकड़नी हो उन्हें अंधेरे का सामना करना होता है। ऐसी स्थिति महिला यात्रियों को काफी नागवार गुजरती है।
कहने को तो साइबर सिटी है लेकिन अगर यहां कि किसी महिला को रात में बस पकड़नी हो तो उसे किसी ना किसी के साथ ही आना पड़ता है। बता दें कि यहां से रात को करीब 58 बसें अप-डाउन करती हैं।
करीब 13 बसें यहां से लांग रूट के लिए रात में निकलती हैं। सैकड़ों यात्रियों का बस स्टैंड पर रात भर आना-जाना रहता है। जिसमें महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी रहती है। बस अड्डे पर लाइटों का भारी अभाव है।
यहां किसी भी समय कोई भी असामाजिक तत्व किसी भी घटना को अंजाम दे सकता है। रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि यहां दो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। मगर जब मौके पर देखा गया तो इसकी गुणवत्ता काफी खराब निकली। कुछ लोगों ने तो शक जाहिर किया कि यह चलता भी है या नहीं।
रात 8:30 बजे
बस अड्डे में कदम रखते ही दिखा की नशेड़ियों की महफिल जमी है। वहीं घुमंतू लोग रात बिताने के लिए वहां पर अपने बिस्तर लगाते हुए दिखे। अंधेरा इतना था कि मोबाइल से उनकी फोटो करने में सफलता नहीं मिली। लोगों ने बताया कि दिन ढलते ही रोजाना इनका अड्डा लग जाता है। इसमें शराबियों की संख्या काफी अधिक होती है।
रात 9:00 बजे
बस का इंतजार करने के लिए बड़ी संख्या में यात्री बस अड्डा परिसर में बैठे रहे। अंधेरा ज्यादा होने के कारण मोबाइल की रोशनी में उन्हें बसों को खोजते देखा गया। यात्रियों ने कहा कि रोशनी का प्रबंध नहीं होने से यहां काफी दिक्कत होती है। कई बार तो झपटमार पर्स या थैला छीन कर भाग जाते हैं।
रोडवेज डिपो में सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। जहां तक लाइट की बात है अगर कहीं से कोई लाइट खराब है तो उसको जल्द ही ठीक करा दिया जाएगा।
जयदीप कुमार, महाप्रबंधक गुरुग्राम रोडवेज डिपो।