नौ महीने पहले सराय ख्वाजा रेलवे फाटक के पास मिले शव को हादसा बताकर पल्ला झाड़ने वाली जीआरपी अब बैकपुट पर आ गई है। पुलिस आयुक्त के आदेश पर जीआरपी ने अब इसे हत्या का केस दर्ज कर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
कटन पहाड़ी गुरुकुल निवासी 40 वर्षीय रामकुमार पाली क्रेशर जोन में बतौर मुंशी काम करते थे। 16 दिसंबर 2015 की शाम घर लौटते वक्त उनका फोन स्विच ऑफ हो गया।
परिजनों ने काफी खोजबीन की लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस ने जब उनका फोन सर्विलांस पर लगाकर देखा तो अंतिम कॉल सराय ख्वाजा के पास मिली। अगले दिन उनका शव सराय ख्वाजा रेलवे फाटक के पास ट्रैक पर पड़ा मिला।
जीआरपी ने तब मामले को रेल हादसा बताकर पल्ला झाड़ लिया था। परिजन इसे हादसा मानने को तैयार नहीं थे। मृतक की पत्नी संतोष देवी, भाई अशोक कुमार और सामाजिक कार्यकर्ता मायाराम सूर्यवंशी ने इस मामले को पुलिस आयुक्त डॉ. हनीफ कुरैशी के सामने उठाया और उनसे गहनता से जांच की अपील की। पुलिस आयुक्त ने जीआरपी को इस मामले को नए सिरे से हत्या के एंगल से जांच के निर्देश दिए। जीआरपी ने हत्या का केस दर्ज कर नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।