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जांच में लापरवाही पर पुलिस आयुक्त को नोटिस

Wed, 07 Dec 2016 01:56 AM IST
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोर्ट ने एलजी व गृह सचिव को भिजवाई कॉपी, एसीपी व डीसीपी को कारण बताओ नोटिस
4.50 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में डेढ़ साल बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं करने का मामला 
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डेमो पिक - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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धोखाधड़ी के मामले में जांच में लापरवाही व ढील को लेकर अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब किया है। पुलिस के रवैये पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए निर्देश की कॉपी उपराज्यपाल व गृह सचिव को भेजने के लिए कहा है।
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अदालत ने इलाका एसीपी व डीसीपी को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मामला 4.50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में डेढ़ साल बाद भी चार्जशीट दाखिल न करने से जुड़ा है।

कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी सुनील बेनीवाल ने पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि पुलिस आयुक्त बताएं कि मामले की जांच क्यों उचित तरह से नहीं हुई।
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पुलिस आयुक्त इस मामले में जांच अधिकारी रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच करें कि उन्होंने क्या और कितनी जांच की। बहस करते हुए मामले में पीड़ित सुनील गोयल के अधिवक्ता मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने फरवरी 2015 में एफआईआर दर्ज की थी।

इतना समय बीतने के बाद भी पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल नहीं की, क्योंकि मामले में कई जांच अधिकारी पुलिस ने बदल दिए। अदालत ने इस निर्देश की कॉपी पुलिस उपायुक्त के माध्यम से उपराज्यपाल व गृह सचिव को भेजने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि ये कार्यालय निर्देश की कॉपी मिलने की पुष्टि भी करें। कोर्ट ने मामले में पुलिस की लापरवाही की जांच का निर्देश देते हुए कहा कि अब जांच अधिकारी न बदला जाए। अगर जांच अधिकारी बदला जाता है, तो यह समय की बर्बादी होगी।

कोर्ट ने इंस्पेक्टर केएस रावत को केस की फाइनल रिपोर्ट 16 दिसंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है। मामले में पीड़ित कारोबारी सुनील गोयल ने जनवरी 2015 में अपने साझेदार व जीजा अखिलेश गुप्ता और बहन अंजू गुप्ता पर 4.50 करोड़ की धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए कोर्ट में शिकायत दायर की थी।

कोर्ट ने 2 फरवरी 2015 को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश जगतपुरी थाना पुलिस को दिया था। पीड़ित का आरोप था कि अखिलेश गुप्ता ने कंपनी के बाइक शोरूम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की और कंपनी की देनदारियां देने के बजाय यह रकम अपने व पत्नी के बैंक खातों में जमा करवा दी।
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