ग्रेटर नोएडा में बिसरख कोतवाली क्षेत्र के तुस्याना गांव में पिछले सात दशकों से हत्या की कोई घटना नहीं हुई थी, लेकिन सातवें दशक के अंत में अचानक परिवार के लोगों ने ही अपनों की जान ले ली।
इससे गांव के लोग सकते में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मारपीट की घटनाएं तो गांव में होती रही हैं, लेकिन हत्या की घटना 70 साल में पहली बार हुई हैं।
तुस्याना में इतने लंबे समय से हत्या की घटना नहीं होने पर लोग गांव की मिसाल दिया करते थे।
मृतक की पत्नी को भी जान का खतरा
गांव के पूर्व प्रधान रवि भाटी बताते हैं कि उनके पूर्वज इस बात से खुश थे कि गांव में 70 साल से हत्या की एक भी घटना नहीं हुई, लेकिन अचानक इस दोहरे हत्याकांड से उनके गांव को भी अन्य गांवों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।
ग्रामीणों की मानें तो गांव के लोगों ने पंचायत करके मामले का हल निकाल लिया था, लेकिन अचानक हत्या की घटना को अंजाम दे दिया गया।
इस हत्याकांड से लोग शेखर की पत्नी सरिता, उसकी बच्ची और कोख में पल रहे बच्चे को लेकर चिंतित दिखे। चूंकि अगर हत्यारोपी शेखर और उसके दादा की हत्या कर सकते हैं तो सरिता की जान भी अब खतरे में है।
घर में आराम से बैठे थे आरोपी
रामपाल ने घर के दो हिस्से करके अपने बेटे श्री और जगदीश का बंटवारा कर दिया था। इसमें एक ओर श्री का बेटा शेखर और दूसरी ओर जगदीश का परिवार रह रहा था।
जगदीश और उसके बेटे रात में दोहरे हत्याकांड को अंजाम देकर अपने घर में इस तरह बैठे थे कि मानों कोई दूसरे गांव के लोग हों।
गांव के लोग घटनास्थल पर पडे़ खून और दादा-पोते के शव को देखकर दांतों तले उंगली दबा रहे थे, लेकिन हत्यारोपी दीवार पार करके भी नहीं देख रहे थे। जब पुलिस का सायरन बजा तो आरोपी घर को छोड़कर भाग खडे़ हुए।