किसी महिला के लिए मां बनना उसके जीवन का सबसे खुशी का दिन होता है, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी अभिशाप से कम नहीं। बदायूं कांड की सुर्खियों के बीच गौतमबुद्ध नगर में एक ऐसी दुष्कर्म पीड़िता है, जो कच्ची उम्र में मां बनने को अभिशप्त है।
शारीरिक तौर पर और बोलने में भी यह किशोरी सक्षम नहीं है। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. माला के अनुसार 21 वर्ष और इससे अधिक उम्र मां बनने के लिए उपयुक्त है।
किशोरावस्था में शरीर का पूरा विकास नहीं होता है। ऐसी स्थिति में डिलीवरी होने पर कई तरह की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। जन्म लेने वाला बच्चा भी अविकसित हो सकता है।
गौतमबुद्ध नगर के जिला अस्पताल में है भर्ती
दुष्कर्म का दंश झेल रही ग्रेटर नोएडा की इस नाबालिग को 15 साल की उम्र में मां बनने का खतरा उठाना पड़ रहा है। छह मार्च 2014 को चाइल्ड लाइन को कासना थाने से मामले की जानकारी मिली।
पीड़ित की मां की शिकायत पर कासना थाने में मामला दर्ज हुआ और आरोपी नेपाल सिंह (40) को गिरफ्तार कर लिया गया। अस्पताल में मेडिकल जांच में पता चला कि किशोरी को पांच माह का गर्भ है।
जिला अस्पताल में किशोरी का उपचार चल रहा है। अस्पताल प्रशासन आर्थिक रूप से कमजोर इस किशोरी को मेडिकल जांच के लिए घर से अस्पताल लाने और छोड़ने के लिए सरकारी एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध कराता है।
नौ जुलाई को है डिलेवरी डेट
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपीएन मिश्र के अनुसार किशोरी को एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उसका हर महीने अस्पताल में चेक अप होता है।
चाइल्ड लाइन ग्रेटर नोएडा की निदेशिका डॉ. माला भंडारी ने बताया कि नौ जुलाई को किशोरी की डिलीवरी डेट है। डीएम से किशोरी के डॉक्टरी परामर्श के आधार पर खानपान और आर्थिक मदद के लिए निवेदन किया था। सरकार से भी मदद मांगी गई, लेकिन मदद नहीं मिली।
जबकि किशोरी की मां का कहना है कि वे पति-पत्नी घरों में झाड़ू-पोंछा करते हैं। खुद के खाने के लाले हैं। बेटी और होने वाले बच्चे के भविष्य की चिंता है।