नौ मई को दनकौर के डिग्री कॉलेज के पूर्व प्रबंधक और व्यापारी मनमोहन चौधरी को दो दिन पहले ही पता चल गया था कि उनकी हत्या हो सकती है। उन्होंने इसकी जानकारी सीओ को दी थी, लेकिन सही समय पर सुरक्षा नहीं दी गई... जिसके चलते वारदात हुई।
हत्या से पहले एक आरोपी ने मनमोहन के पैर छुए और इसी दौरान साथ खड़े आरोपियों ने पिस्टल और तमंचों से गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। दनकौर के एक शख्स ने ये जानकारी पुलिस को दी। उसने बताया कि पैर छूने वाले युवक ने मनमोहन से पूछा कि चाचा पहचाना नहीं, इस पर मनमोहन ने कहा कि नहीं बेटा।
इसी दौरान युवक ने उन्हें सटाकर गोली मार दी। मनमोहन ने बचने की कोशिश भी की, लेकिन एक दुकान में जाते वक्त आरोपियों ने एक और गोली मार दी और मनमोहन गिर पड़े। पुलिस का दावा है कि हत्या से एक दिन पहले आरोपियों ने मनमोहन से 16 मिनट तक बात की, कॉल डिटेल में ये जानकारी मिली है।
पुलिस की मानें तो इस हत्याकांड में कई गैंग शामिल है। बदमाशों की नजर चार नहीं, बल्कि पूरी 40 बीघा जमीन पर थी। जमीन के लिए दनकौर का एक गैंग दूसरे नामी गैंग से भिड़ने को भी तैयार था, लेकिन चार बीघा जमीन का बैनामा करने की शर्त थी। जब मनमोहन ने बात नहीं मानी तो उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया।
पुलिस का कहना है कि हत्या में तीन युवक शामिल थे, इनमें इमलिया और बागपुर दो युवक भी शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो इन दो युवकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने विवादित जमीन को खरीदकर एक गिरोह के नाम रजिस्ट्री कराने वाले शख्स को भी निशाने पर लिया है, लेकिन वह अभी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है।