डॉक्टरी रिपोर्ट में पिता पर रेप का आरोप पूरी तरह तय न होने पर एक अदालत ने पिता की सजा कम कर दी है। अदालत ने रेप के एक मामले में दोषी पिता को मिली सजा को रद्द करने से इनकार कर दिया।
हालांकि अदालत ने उसकी तीन पुत्रियों व एक पुत्र का हवाला देते हुए आजीवन कारावास की सजा को 10 साल की कैद में तब्दील कर दिया। वहीं अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह पीड़िता को तीन लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे।
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में दोषी ने अपनी ही नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म किया। अदालत ने दोषी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसकी दूसरी पत्नी ने पुत्री से मिलकर पैसे ऐंठने के लिए उसे झूठे आरोप में फंसाया है।
अदालत ने माना दोषी पर सजा घटाई
उन्होंने दोषी के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि चिकित्सा रिपोर्ट में कई खामियां है और रेप की पुष्टी नहीं होती। अदालत ने कहा कि पीड़िता ने पुलिस, मजिस्ट्रेट व अदालत के समक्ष तीन बयान दिए हैं और उसके बयानों के समक्ष चिकित्सा रिपोर्ट पर ज्यादा बल नहीं दिया जा सकता।
अदालत ने निचली अदालत को कई खामियां बरतने पर फटकार लगाई है। कोर्ट ने पीड़िता की चिकित्सा जांच करने वाले एम्स के डॉक्टर को फटकार लगाते हुए चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि भविष्य में लापरवाही बरतने पर उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने दिल्ली सरकार, उपराज्यपाल, महिला एवं बाल कल्याण विभाग, गृह मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इत्यादि को नोटिस जारी कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि रेप मामलों व नए कानून के संबंध में जागरूकता अभियान चलाने के संबंध में अब तक क्या किया गया है। मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।