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जिगिषा घोष मर्डर केस में अदालत ने एटीएम के गार्ड को माना अहम गवाह 

Tue, 23 Aug 2016 12:34 AM IST
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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ज‌िग‌िषा घोष के हत्यारों को फांसी व उम्रकैद की सजा - फोटो : अमर उजाला
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जिगिषा घोष हत्या मामले को अदालत ने दुर्लभतम मानते हुए दो दोषियों को मृत्युदंड व तो तीसरे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने बचाव पक्ष की उन सभी दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें नरमी बरतने का आग्रह किया गया था।
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अदालत ने पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भरोसेमंद मानते हुए अपना फैसला सुनाया। अदालत ने महीपालपुर स्थित एटीएम के गार्ड भीवा राम को अहम गवाह माना क्योंकि आखिरी बार जिगिषा को दोषियों के साथ उसने ही देखा था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इन दोषियों ने ही 18 मार्च 2009 को अपहरण व लूटपाट के बाद जिगिसा घोष की हत्या कर दी थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में कामयाब रहा है कि इन आरोपियों ने ही जिगिषा को 18 मार्च 2009 की सुबह चार बजे वसंत कुंज स्थित उसके घर के बाहर से अगवा किया और उसकी हत्या की। 
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क्या था दिल्ली पुलिस का आरोप?

jigisha ghose murder
हत्या के बाद इन आरोपियों ने जिगिषा के शव को फरीदाबाद के जंगलों में फेंक दिया। इन आरोपियों ने उसकी सोने की चेन, दो मोबाइल, डेबिट व क्रेडिट कार्ड लूटे। इन दोषियों ने उसके क्रेडिट कार्ड से खरीदारी की और रसीद पर भी दस्तखत किए। 

दिल्ली पुलिस का आरोप 
दिल्ली पुलिस का आरोप था कि रवि कपूर व अन्य दोषियों ने जिगिषा घोष को उसके घर के नजदीक से 18 मार्च 2009 को अगवा कर लिया। इसके बाद वह उसे लेकर महीपालपुर स्थित एटीएम बूथ गए और वहां कैश निकलवाया।

दोषियों ने उसका सामान लूट लिया और हत्या के बाद उसके शव को फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड के जंगलों में फेंक दिया। हत्या के दो दिन बाद हरियाणा पुलिस ने जिगिषा का शव बरामद किया था और इसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दी थी। 

मामले की सुनवाई 15 अप्रैल 2010 को शुरू हुई थी और जिगिषा के पिता सीएल घोष ने अभियोजन के पहले गवाह के तौर पर गवाही दी थी। सरकार ने इस मामले में अधिवक्ता राजीव मोहन के विशेष अधिवक्ता नियुक्त किया था।
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'जब एटीएम से पैसा निकाला तो सुरक्षा गार्ड भीवा राम ने उन्हें देखा था'

ज‌िग‌िषा घोष के हत्यारों को फांसी व उम्रकैद की सजा
कोर्ट ने माना कि अभियोजन के गवाहों, प्रत्यक्ष व परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार आरोप साबित होते हैं। इन आरोपियों ने ही पीड़िता को लूटपाट व हत्या के इरादे से अगवा किया। 

अदालत ने कहा कि इन आरोपियों की कार से पुलिस की वर्दी, बीकन, हथियार, पुलिस की नंबर प्लेट, हरियाणा व पंजाब हाईकोर्ट के जज का स्टीकर बरामद हुआ था। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया जाता है। 

अभियोजन के तर्क 
अभियोजन का कहना था कि दोषियों ने जब एटीएम से पैसा निकाला तो उस समय जिगिषा उनके साथ थी और सुरक्षा गार्ड भीवा राम ने उन्हें देखा था। हत्या के बाद दोषियों ने सरोजनी नगर स्थित प्रेम वाच कंपनी से चश्मे, घड़िया व दूसरा सामान खरीदा था और खरीदारी की रसीद पर दस्तखत किए थे।

दोषियों की गतिविधि दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई थी। पुलिस ने आरोपों को साबित करने के लिए 58 गवाह, सीसीटीवी फुटेज व दूसरे
तमाम परिस्थितिजन्य साक्ष्य कोर्ट में पेश किए थे। 
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