बेटी की हत्या के सात साल बाद अदालती फैसला आने पर उसके माता पिता ने संतोष जाहिर किया। कोर्ट में मौजूद माता पिता ने कहा कि उनके साथ इंसाफ हुआ है। उनकी इच्छा है कि बेटी के हत्यारों को मौत की सजा मिले।
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साकेत जिला अदालत में मुकदमे का फैसला सुनने के लिए जिगिषा के माता पिता व अन्य परिजन आए थे। उनके अलावा टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन के माता पिता भी मौजूद थे। अदालत ने जब रवि कपूर व अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया तो उनकी आंखों से आंसू छलक पडे़। उन्होंने हाथ जोड़कर भगवान व अदालत का शुक्रिया अदा किया।
जिगिषा की मां ने पत्रकारों को रोते हुए बताया कि यह सात साल उन्होंने बेहद कष्ट में काटे हैं लेकिन अदालत ने इंसाफ किया है। इन दोषियों को मौत की सजा मिलनी चाहिए क्योंकि उन्होंने केवल उनकी बेटी को नहीं मारा बल्कि उनकी दुनिया ही खत्म कर दी।
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आज उन्हें पानी पिलाने वाला भी कोई नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमित शुक्ला ने उन्हें धमकाया और कहा कि उनकी बेटी की हत्या उसने नहीं बल्कि रवि कपूर ने की है। जिगिषा के पिता सीएल घोष ने कहा कि इस मामले में पुलिस व अभियोजन पक्ष ने काफी अच्छा काम किया है और वह उनके शुक्रगुजार हैं।
'क्या दोषी भविष्य में दोबारा ऐसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं'
जिगिषा घोष के माता-पिता
- फोटो : अमर उजाला
जिगिषा घोष हत्या मामले में आरोपियों को दोषी ठहराने के बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार के गृह सचिव को परीवीक्षा अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है। यह अधिकारी इस बात की पड़ताल करेगा कि क्या दोषी भविष्य में दोबारा ऐसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं या उनके सुधार की कोई संभावना है।
यह अधिकारी चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगा। यह अधिकारी इन दोषियों के जेल में काटी गई अवधि, उनके परिवार, सहयोगियों व अन्य स्रोतों से अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। अदालत ने यह निर्देश दिल्ली हाईकोर्ट की गाइडलाइन के मद्देनजर दिया है।
गाइडलाइन के मुताबिक जिन मामलों में दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने का प्रावधान है उनमें सजा दिए जाने से पूर्व दोषियों के विषय में परीवीक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मंगाई जाए।
अदालत ने अपने निर्देश में कहा कि यह अधिकारी दिल्ली सरकार से नियुक्त किया जाएगा और इसका खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। अधिकारी इस रिपोर्ट को तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष रूप से तैयार करेगा और इसे पूरी तरह गुप्त रखेगा।
पेश मामले में परीवीक्षा अधिकारी दोषियों का साक्षात्कार करेगा। इस दौरान उनके वकीलों को मौजूद रहने की अनुमति होगी। दोषियों द्वारा साक्षात्कार में दिए तथ्यों की परीवीक्षा अधिकारी उनके परिजनों, स्थानीय लोगों व जानकारों से पुष्टि करेगा। अगर कोई नया या विरोधाभासी तथ्य सामने आएगा तो वह उनका दोबारा साक्षात्कार करेगा।
दोषियों की मनोवृत्ति जानने के लिए परीवीक्षा अधिकारी ऐसे दो मनोवैज्ञानिकों की मदद भी लेगा जो कम से कम दस साल का अनुभव रखते हों। यह अधिकारी इस बात का ध्यान रखेगा कि इस अपराध का जिगिषा के माता पिता पर क्या प्रभाव हुआ है ताकि उन्हें दिए जाने वाला मुआवजा तय किया जा सके।
मामले में जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अतुल कुमार को कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह दोषियों व उनके परिवारों से उनकी वित्तीय स्थिति की पड़ताल करेगा ताकि उनके द्वारा जुर्माने या मुआवजा देने की क्षमता आंकी जा सके। इसके अलावा जांच अधिकारी सरकार की ओर से नियुक्त परीवीक्षा अधिकारी की सहायता भी करेगा।
जिगिषा घोष हत्याकांड - कब क्या हुआ
18 मार्च 2009: जिगिषा घोष को कैब ने सुबह चार बजे उसके घर के नजदीक छोड़ा, दोषियों ने किया अगवा।
19 मार्च 2009: सूरजकुंड इलाके में मिला जिगिषा का शव।
25 मार्च 2009 : पुलिस ने दोषियों को किया गिरफ्तार, पुलिस ने पत्रकार सौम्या विश्वनाथन मर्डर केस भी सुलझाया, उसे 30 सितंबर
2008 की रात कार से घर लौटते समय दोषियों ने मार दी थी गोली।
जून 2009: पुलिस ने जांच के बाद जिगिषा घोष मामले में चार्जशीट की दाखिल।
10 अगस्त 2009: कोर्ट ने आरोपों पर बहस सुनने के लिए 28 अगस्त की तारीख की तय।
05 दिसंबर 2009: कोर्ट ने तीन आरोपियों के खिलाफ तय किए आरोप।
15 अप्रैल 2010: मुकदमे की सुनवाई हुई शुरू, जिगिषा के पिता बने अभियोजन के पहले गवाह।
05 जुलाई 2016: कोर्ट ने अंतिम जिरह सुनने के बाद फैसला रखा सुरक्षित।
14 जुलाई 2016: कोर्ट ने तीन आरोपियों को हत्या, अपहरण, लूटपाट समेत कई धाराओं में ठहराया दोषी।