उत्तर प्रदेश के हाइवे नंबर 91 पर शुक्रवार रात हैवानियत की जो हदें पार हुईं, उसमें एक मासूम बच्ची के सपने भी बिखर गए, जिसमें वो आईपीएस बनकर देशसेवा का सपना देखती थी।
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हैवानों के अलावा पुलिस, प्रशासन और डॉक्टर का चेहरा, उस मासूम बच्ची के जेहन में बसा है उसे हटाने के लिए काफी समय तक की काउंसलिंग भी कम पड़ेगी। बच्ची की प्रतिभा से रूबरू होने व उसके साथ हैवानियत का वाकया सुनकर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या की आंखे भी नम हो गई।
हालांकि आयोग का कहना है कि हैवानियत बेशक इंसानियत पर भारी पड़ी हो लेकिन परिवार के उस हौसले व जज्बे को सलाम करते हैं, जिसमें इतना भारी दर्द मिलने के बाद भी बेटी को जिंदगी से जोड़ने की जद्दोजहद जारी है।
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आठवीं में 86 फीसदी नंबर मिले थे
बुलंदशहर गैंगरेप
- फोटो : अमर उजाला
मासूम बच्ची की प्रतिभा से रूबरू होने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता रेखा शर्मा कहती हैं कि वे खुद दो बेटियों की मां हैं, इसलिए उस मां का दर्द भलीभांति समझ सकती हूं, जोकि अपने दर्द को छुपाकर अपनी बेटी के दिल और जेहन से इस हैवानियत को निकालने में जुटी है। हालांकि मैं अब इस बच्ची के सपनों को साकार करने में मदद करुंगी।
आठवीं में 86 फीसदी नंबर मिले थे
रेखा ने बताया कि बिटिया सीबीएसई के स्कूल में पढ़ती है और आठवीं कक्षा में 86 फीसदी नंबर आए थे। बच्ची की प्रतिभा व पढ़ाई में होशियार होने के चलते ही परिवार आर्थिक तंगी की परवाह किए बगैर उसे अच्छी तालीम देकर उसके सपनों को पंख देना चाहता था।
बिटिया का सपना है कि खाकी पहनकर आम लोगों की मदद करना। इसीलिए परिवार उसकी पढ़ाई पर खास फोकस किए हुए हैं। इस घटना के बाद भी परिवार का हौंसला नहीं टूटा है।
कुछ दिन बच्ची को घर लेकर आऊंगी: रेखा
बुलंदशहर गैंगरेप
- फोटो : अमर उजाला
बल्कि बुआ, चाचा-चाची समेत अन्य रिश्तेदार एक-दूसरे का हाथ थामकर मुश्किल घड़ी में हौंसले बढ़ा रहे हैं। खास तौर पर मासूम बच्ची का परिवार बहुत ख्याल रख रहा है।
कुछ दिन बच्ची को घर लेकर आऊंगी: रेखा
रेखा ने बताया कि पीड़िता जब शारीरिक रूप से ठीक हो जाएगी, उसके बाद मैं उसे अपने घर लेकर आऊंगी। हफ्ता-दस दिन उसे घर में रखने के दौरान बेहतर काउंसलिंग के साथ जिंदगी के अच्छे पहलुओं से रूबरू करवाऊंगी।
ताकि वो इस घटना का भूलकर अपने सपनों को आगे बढ़ने का हौंसला ला सके। बच्ची के मन में इस बात को भरना होगा कि वे क्यों शर्म करें। क्योंकि उसने कोई गलती नहीं की है, जिसने गलती की है, उसे सजा मिलनी चाहिए। इस काम में मेरी दोनों बेटियों से भी बात हुई है, वो भी मदद करेंगी।
बेशक इस घटना के बाद खाकी के प्रति बच्ची के मन में नकारात्मक पहलू आए हों, लेकिन उसी को उदाहरण रखकर उसे इस बात के लिए तैयार किया जाएगा कि दोबारा फिर ऐसा हादसा न हो।
इसकी जिम्मेदारी पुलिस पर है और यदि वह आईपीएस बनती है तो वह आम लोगों की मदद आराम से कर सकेंगी।
आयोग काउंसलिंग से आगे बढ़ने में करेगा मदद
'बच्ची के मन में इस दर्दनाक हादसे को भुलाने के लिए राष्ट्रीय महिला आयभोग अच्छे से काउंसलिंग करवाएगा। इसके अलावा पढ़ाई में भी जो मदद बच्ची को चाहिए होगी, वो उपलब्ध करवायी जाएगी।' -ललिता कुमारमंगलम, अध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला आयोग।