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सनसनी: स्कूल के टॉयलेट में लटकी थी छात्रा की लाश

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गुड़गांव के सेक्टर-22 स्थित रोटरी पब्लिक स्कूल में 12वीं की एक छात्रा की रहस्यमय हालात में मौत हो गई। उसका शव बाथरूम में डोरी के सहारे लटका मिला।
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घटना की सूचना मिलते ही हर तरफ हड़कंप मच गया। जानकारी में मिलने पर स्कूल की बिल्डिंग से सटे थाने की पुलिस भी पहुंच गई।

छात्रा की मौत पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहां स्कूल इसे आत्महत्या बता रहा है वहीं दूसरी ओर छात्रा के परिजन हत्या का आरोप लगा रहे हैं।

स्कूल में बैन है मोबाइल

घटना स्कूल के लंच टाइम की बताई गई है। एसीपी क्राइम राजेश कुमार ने बताया कि लड़की मोबाइल पर चैटिंग कर रही थी। स्कूल की एक टीचर ने उससे मोबाइल लेकर इसकी सूचना स्कूल के वाइस प्रिंसिपल को दी।

स्कूल प्राचार्या गुलशन दीवान ने कहा कि स्कूल में मोबाइल पर प्रतिबंध है। वाइस प्रिंसिपल ने लड़की से मोबाइल बरामद होने की सूचना उसके पिता को दे दी थी।

उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि इतनी छोटी सी बात पर छात्रा ने यह कदम उठा लिया।

घटना के बाद कोई नहीं जा पाया भीतर

डीएलएफ फेज चार में रहने वाली छात्रा वंदना ने पिछले साल ही 11वीं कक्षा में रोटरी स्कूल में दाखिला लिया था। उसके भाई हिमांशु ने भी यहीं से 12वीं तक पढ़ाई की है। उसके पिता अजय कुमार का अपना व्यवसाय है।

घटना के बाद प्रशासन ने स्कूल सील कर दिया। किसी को अंदर नहीं घुसने दिया। यहां तक कि घटना के बाद स्कूल पहुंचे छात्रा के परिजनों को भी देर तक बाहर रखा गया। इस पर सिक्योरिटी और उनके बीच नोक-झोंक भी हुई।

परिजनों ने आत्महत्या की बात को सिरे से नकार दिया है। उनका आरोप है कि छात्रा की हत्या की गई है। उन्होंने पुलिस जांच के दौरान ही कई सवाल भी खड़े किए। इस कारण पुलिस देर तक जांच में जुटी रही। स्कूल के स्टाफ सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ की गई।

लड़की ने टाइल से काटी नस!

उधर, घटना के बाद स्कूल से बच्चों को भी नहीं निकलने दिया गया। छोटे बच्चों को निश्चित समय पर छुट्टी दे दी गई, लेकिन बड़ी क्लास के बच्चों को करीब चार बजे स्कूल से निकाला गया।

एसीपी क्राइम राजेश कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही स्कूल बिल्डिंग से लगे थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। छात्रा के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है।

पालम विहार थाना प्रभारी के अनुसार, जांच पूरी होने तक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लगता है।

जांच में लड़की के दोनों हाथ की नसें कटी हुई मिली है। बाथरूम से टूटी हुई टाइल भी मिली है। जाहिर है नसें काटने के लिए लड़की ने इसका उपयोग किया है।

ये सवाल जो पैदा कर रहे हैं संदेह

1- स्कूल में सीसीटीवी कैमरा होने के बाद भी लड़की की लोकेशन पता करने में घंटा भर का समय कैसे लग गया। जबकि नियम के मुताबिक बाथरूम के कॉरिडोर में सीसीटीवी कैमरा लगा होता है।

2- लड़की के पास कपड़े की कतरननुमा रस्सी कहां से आई। जिसके सहारे उसने बाथरूम के एक्जॉस्ट फैन में फंदा लगाया। परिजनों का आरोप है कि गले पर फंदे का कसाव न के बराबर था। जिससे मौत संभव नहीं है।

3- स्कूल में मोबाइल पर प्रतिबंध है तो लंच टाइम में लड़की के हाथ में मोबाइल देखकर ही इसकी जानकारी प्रशासन को मिल पाई। जबकि कायदे से विद्यार्थियों के बैग की जांच होनी अनिवार्य है। इससे साफ है कि स्कूल में विद्यार्थियों के बैग सर्च नहीं किए जाते।....

कैसे आया खून?

4- बताया जा रहा है छह महीने पहले भी लड़की मोबाइल पर मैसेज करती हुई पकड़ी गई थी। उसके परिजनों को उसी समय इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई?

5- लड़की के दोनों पैर के जूते खुले मिले हैं। टॉयलेट शीट पर उसका एक पैर था, जबकि बगल में रखा डस्टबिन अपनी नीयत स्थान पर रखा हुआ था। बाथरूम के दरवाजे के ठीक पीछे खून बिखरा था।

6- लड़की ने हाफ बाजू की शर्ट पहनी थी। उसका बायां हाथ दीवार और कमर से सटा था जबकि दायां हाथ बगल में था। पूरे शरीर सहित ड्रेस पर कहीं भी खून का कोई धब्बा नहीं था। अब सवाल ये कि खून कहां से आया।

इससे पहले भी हो चुकी है घटना...

स्कूल में छात्रा की रहस्यमयी मौत की घटना पहले भी हो चुकी है। करीब सात महीने पहले जैकमपुरा के स्कूल में 12वीं की छात्रा ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी।

यह मामला आज भी रहस्यमय बना हुआ है। स्कूल की प्राचार्या गुलशन दीवान से बार-बार उनके फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

छात्र की मौत से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। हर तरफ लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। वहीं छात्रा के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

निजी स्कूल नहीं लगाते CCTV

शहर के निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई माकूल बंदोबस्त नहीं है। गुरुवार को सेक्टर-22 स्थित रोटरी पब्लिक स्कूल में एक छात्रा की संदिग्ध हालत में हुई मौत इस बात को साबित करती है।

नियमानुसार स्कूल समय में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेवारी स्कूल प्रबंधक की है। बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रत्येक स्कूल में सीसीटीवी कैमरा लगाने को कहा गया था। बड़े स्कूलों को छोड़ मझोले और छोटे स्कूलों में इसकी माकूल व्यवस्था नहीं है।

अधिकतर स्कूलों में मुख्य द्वार और मुख्य रास्तों के अलावा कहीं कैमरे नहीं होते हैं। इससे छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखना संभव नहीं हो पाता। रोटरी पब्लिक स्कूल की घटना में यह भी साबित होती है।

आखिर क्या हैं कारण?

स्कूलों में क्लास रूम, गलियारा, मैदान और बाथरूम के कॉरिडोर में भी सीसीटीवी लगाने का प्रावधान है। अगर स्कूल में सीसीटीवी की समुचित व्यवस्था होती तो शायद छात्रा की जान बच जाती और सीसीटीवी फुटेज के जरिए पता चल जाता कि छात्रा कहां है और क्या कर रही है?

एक सीसीटीवी कैमरा और उसका पूरा सेटअप लगाने में करीब 50-75 हजार रुपये की लागत आती है। इसमें 12-16 कैमरे की मॉनिटरिंग होती है। इसके अलावा अलग से कैमरे लगाने के लिए 3000 से 9000 रुपये तक का खर्च आता है।

स्कूलों में अच्छी क्वालिटी के कैमरे लगाने का प्रावधान है। अच्छी क्वालिटी के कैमरे की कीमत करीब पांच से छह हजार रुपये होती है। 16 से अधिक कैमरा लगाने पर कैप्चरिंग व मॉनिटरिंग के लिए अलग से सिस्टम लगाना पड़ता है। इस वजह से मझोले और छोटे स्कूल प्रबंधक परहेज करते हैं।
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घटना के खिलाफ एकजुट होंगे अभिभावक

अभिभावक एकता मंच के जिला महासचिव दिलीप गुप्ता ने बताया कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार मुद्दा उठाया जा चुका है।

शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर बैठक की जाएगी। किस तरह पूरी घटना हुई है और स्कूल प्रशासन की क्या भूमिका है? इस पर जानकारी जुटाई जाएगी।

हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष एसएस गुंसाई ने कहा कि स्कूलों में विजलेंस जरूरी है। कैमरे से क्लास रूम की एक्टिविटी का पता लगता है। बच्चों की जिम्मेवारी स्कूल प्रशासन की है। स्कूल में हुई दुर्घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगली बैठक में इस बारे में चर्चा की जाएगी।
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