14 फरवरी 2003 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इतिहास के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट प्रो. आईजी खान के अपहरण, मर्डर, लूट का सामान रखने और साक्ष्य मिटाने के आरोप में तीन आरोपियों को गाजियाबाद सीबीआई विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी ने दोषी माना है।
इनमें से एक आरोपी को कोर्ट ने एक साल और बाकी दो को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। तीनों पर दो-दो हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। इसी मामले के दो आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक बीके सिंह ने बताया कि अलीगढ़ के सिविल लाइन इलाके में रहने वाले आई जी खान 14 फरवरी 2003 को अपनी डाक्टर पत्नी जुल्फिया खान को उनके अस्पताल के बाहर ड्रॉप करके कार से चले गए थे।
उसी दिन दोपहर को आईजी खान की लाश अकबराबाद थाना क्षेत्र के गांव करहैला के जंगल से बरामद हुई थी। उनकी कार और लैपटॉप बदमाश लूट ले गए थे। इस मामले में आईजी खान के भाई राशिद गनी खान ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में कार के साथ पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
लोक अभियोजक ने बताया कि बाद में यह मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया था। इस मामले में सीबीआई ने गंभीर सिंह, ओमवती, प्रवीण, तेजवीर और हरेंद्र समेत आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। नाबालिग होने के चलते तीन आरोपियों का मामला जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है।
सोमवार को गाजियाबाद सीबीआई विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी ने सुनवाई पूरी होने के बाद प्रवीण को एक साल और तेजवीर एवं हरेंद्र को तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई। गंभीर सिंह और ओमवती को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।