औद्योगिक नगर के नशेबाज प्रति दिन सौ किलोग्राम से अधिक गांजा पी जाते हैं। शहर में यह गांजा पश्चिम बंगाल, बिहार और नेपाल से यूपी के रास्ते पहुंचता है।
नशे का यह कारोबार शहर में खुलेआम चल रहा है। शहर की पुलिस नशे के सौदागरों के खिलाफ तभी सक्रिय होती है जब शासन या विभाग के आला अधिकारियों ने अभियान चलाने का आदेश दिया हो।
पुलिस आयुक्त कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक इस साल 10 जून तक पुलिस ने 18 जगहों पर छापामारी कर 771 किलोग्राम गांजा बरामद किया जबकि एक जगह से चार किलोग्राम अफीम बरामद हुई।
इन छापामारी में करीब पचास लोगों को जेल भेजा गया। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक तस्कर बिहार और पश्चिम बंगाल में एक हजार रुपये किलो की दर से गांजा खरीदते हैं यहां इसकी कीमत चार से पांच हजार रुपये प्रति किलो हो जाती है।
ट्रेन और बसों के जरिए होती है सप्लाई
नशे में जिंदगी बर्बाद करती यूवा पीढ़ी
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तस्कर ट्रेन और बसों के जरिए यहां माल लाते हैं। पुलिस अधिकारी का अनुमान है कि शहर में प्रतिदिन सौ किलोग्राम से अधिक गांजा खप जाता है।
सीनियर इंस्पेक्टर स्तर के एक अधिकारी के मुताबिक नशे का यह कारोबार पुलिस की जानकारी में होता है। यही वजह है कि पुलिस इनके खिलाफ तब तक कार्रवाई नहीं करती जब तक कोई शिकायत न हो या फिर अभियान के आदेश न हों।
उनके मुताबिक शहर के नशे के कारोबारियों का जाल शहर के हर गली, मोहल्ले तक फैला है। एसीपी स्तर के एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक अभियान के दौरान भी पुलिस महज दो से तीन फीसदी गांजा ही पकड़ पाती है।
नशे के कारोबारियों को अभियान की जानकारी भी चलने से पहले पहुंच जाती है। ऐसे में पुलिस और कारोबारी छापामारी और माल बरामदगी की औपचारिकताएं ही पूरी करते हैं।