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100 करोड़ रुपये खर्च करने वाला सीएमडी निकला फर्जी

Tue, 06 Jun 2017 12:57 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गुरुग्राम
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- फोटो : अमर उजाला
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35 वर्ष तक 100 करोड़ रुपए खर्च कर मेवात के एक गांव को लंदन बनाने का दावा करने वाला पूना की कंपनी का सीएमडी फर्जी निकला। इससे पहले कि वह ग्रामीणों के साथ कोई ठगी करता, उसे पुलिस की हिरासत में भेज दिया गया।
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खास बात यह रही कि कथित सीएमडी मेवात के एक गांव की गोशाला में अगले 35 साल तक प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये निवेश करने की बात कहते हुए पिछले पंद्रह दिन से मेवात में रुका हुआ था। जहां उसने न केवल अपनी इनवेस्टमेंट को लेकर सर्वे का काम शुरू कर दिया था। बल्कि इस काम के लिए गांव के ही कुछ युवाओं को नौकरी पर भी रख लिया।
 
 कथित सीएमडी की वेशभूषा तथा रहन-सहन देखकर गोशाला कमेटी के कुछ लोगों को जब शक हुआ तो वे उसे लेकर डीसी मनीराम शर्मा के यहां पहुंचे। जहां पूछताछ के दौरान वह एक भी सवाल का संतुष्टिजनक जवाब नहीं दे सका।
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साथ ही उसके द्वारा अपने साथ लिए हुए कागजातों से भी मामला गोलमाल दिखा। गोशाला कमेटी के सदस्य की शिकायत पर एसपी नाजनीन भसीन ने आरोपी को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है। एसपी का कहना है कि पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उक्त व्यक्ति का यह प्रोजेक्ट असली है या नकली है। 

नूंह के गांव मरोडा गांव की गोशाला के संचालक महंत परमार्थी ने शिकायत देते हुए कहा कि करीब दो सप्ताह पहले गणेश हरि नाम का एक व्यक्ति उनके पास आया तथा कहा कि वह पूना कि राधाकृष्ण इन्फोबिजनेस सर्विस इन नाम की एक कंपनी का सीएमडी है।

उसने गोशाला संचालक को बताया कि उनकी कंपनी फोरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) का काम करती है। उनकी कंपनी को मरोडा गांव की गोशाला में इन्वेस्टमेंट किए जाने में इंट्रेस्ट  है।  

देशभर में 2.5 लाख करोड रुपये इन्वेस्टमेंट का प्लानऱ्
आरोपी सीएमडी के मुताबिक उनकी कंपनी पूरे देशभर में विभिन्न प्रोजेक्टों पर 2.5 लाख करोड़ रुपये इन्वेस्टमेंट का प्लान कर रही है। जिसमें वे सोलर सिस्टम तथा अन्य प्रोजेक्टों के माध्यम से देश में रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। इसी कड़ी में उनकी कंपनी ने मेवात के मरोडा गांव स्थित गोशाला को इन्वेस्टमेंट के लिए चुना था।

सीएमडी के अकाउंट में जीरो बैलेंस
 डीसी मनीराम शर्मा ने जब सीएमडी का अकाउंट चेक कराया तो उसमें जीरो बैलेंस निकला। उसे जब डीसी ने नेट बैंकिंग के जरिए पिछली अकाउंट स्टेमेंट देने के लिए कहा गया तो आरोपी ने यूजर आईडी तथा पासवर्ड भूलने का बहाना कर दिया। इसके अलावा उसके पास ऐसा कोई कागजात नहीं था, जिसमें 100 करोड़ फंड ट्रांसफर किया गया हो।
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