556 करोड़ के टेंडर गलत तरीके से जारी होने के बाद अब आवास विकास परिषद फर्जी डिग्री विवाद में फंसता नजर आ रहा है।
प्रमोशन प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों की जांच में अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारी की डिग्री ही गलत निकली।
आरोप है कि इंजीनियरिंग की जो डिग्री अधिकारी ने लगाई है वह उसके लिए मान्य ही नहीं। आला अधिकारियों ने मामला सामने आने पर कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी है।
आवास विकास परिषद के वसुंधरा सर्किल में तैनात एक अधिकारी की नियुक्ति सहायक अभियंता के पद पर हुई थी। सहायक अभियंता से उनका प्रमोशन अधिशासी अभियंता के रूप में कर दिया गया।
अधिशासी अभियंता से अधीक्षण अभियंता बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सूत्रों की मानें तो अधिकारी ने नौकरी पर ज्वाइनिंग के दौरान जो डिग्री दी है, वह फर्जी है।
इतना ही नहीं अधिकारी ने प्रोडक्शन ब्रांच की डिग्री लगाई है, जो उनके पद के लिए मान्य ही नहीं है। परिषद अधिकारी मामले की लीपापोती में लगे हैं। हालांकि मामला मीडिया में आने के बाद इसकी जांच कमेटी नियुक्त कर दी गई है।
आवास आयुक्त मोहम्मद शाहबुद्दीन ने बताया कि मामला सामने आने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद निर्णय किया जाएगा। कमेटी डिग्री की जांच के साथ यह भी निर्णय करेगी कि वह डिग्री पद के लिए मान्य है या नहीं।
गलत ठेके दिए जाने के लग चुके हैं आरोप
परिषद का जो अधिकारी फर्जी डिग्री प्रकरण में फंस रहा है, उस पर गलत तरीके से टेंडर जारी करने के लिए भी आरोप लग चुके हैं।
इन आरोपों के समय आवास विकास वसुंधरा कार्यालय पर जमकर हंगामा किया गया था। ऐसे में अब अधिकारी का प्रमोशन रुकने के साथ ही उन पर सख्त कार्रवाई भी हो सकती है।
गलत ठेके की खबर छपने के बाद हड़कंप
मंडोला योजना में 556 करोड़ के ठेके गलत तरीके से जारी करने की खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को परिषद कार्यालय में हड़कंप का माहौल रहा। ठेका जारी करने वाले ज्यादातर अधिकारियों के सीयूजी नंबर बंद रहे।
साथ ही निचले अधिकारियों में घोटाले के बारे में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। उधर, मामले में चीफ इंजीनियर आरके अग्रवाल का कहना है कि ठेके नियमानुसार जारी किए गए हैं। हालांकि डिप्लोमा इंजीनियर संघ के आरोपों की जांच कराई जा रही है।