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फर्रुखनगर कांड : बच्चों की मौत से ‘गुनाह’ कैसे धुले

Wed, 11 Mar 2015 01:57 PM IST
अमर उजाला, साहिबाबाद
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रिजवान का परिवार उजड़ गया, उसके बच्चों की मौत हो गई और पुलिस ने उसी पर शिकंजा कस दिया। ये कहना था फरुर्खनगर के गांव वासियों का।
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ग्रामीण मामले में जिलाधिकारी से मुलाकात कर रिजवान के ऊपर लगाई गई आईपीसी की धारा 304 को हटाने और परिवार को मुआवजा देने की मांग करेंगे।

हालांकि पुलिस का कहना है कि बच्चों की मौत से रिजवान के गुनाह कैसे धुल सकते हैं। वह अवैध रुप से पटाखाें का कारोबार कर रहा था।

स्पष्ट रूप से हादसे में उसकी गलती झलक रही है। मानवीय आधार पर वह कानूनी कार्रवाई से बच नहीं सकता है।

गांव में रिजवान के घर पर ताला लगा था। परिवार के लोग लोनी के सिटी अस्पताल में थे, जहां रिजवान का इलाज चल रहा है। उसकी पीठ पटाखों के धमाके से जल गई है।

फिलहाल गांव वासी उसकी हालत स्थिर बता रहे हैं। रिजवान के घर से कुछ दूरी पर उनके पिता का घर है। जहां घर के बाहर बैठे गांव वासी शोक प्रकट करने आए थे।

यहां मौजूद गांव के पूर्व प्रधान अहमद फारुख ने कहा कि रिजवान और उसके परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है और पुलिस ने उसी पर गैरइरादतन हत्या की धारा 304 में रिपोर्ट दर्ज कर ली।

कोई अपने बच्चों को क्यों मारेगा? पुलिस और प्रशासन ने गलत रिपोर्ट दर्ज की है। अगर रिपोर्ट दर्ज भी करनी थी तो 304ए में दर्ज करते, लेकिन धारा 304 का तो सवाल ही नहीं उठता है।
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यह एक हादसा था। गरीब परिवार है, मुआवजा मिलने के बजाय, उसी पर रिपोर्ट दर्ज कर ली। इस दौरान मौजूद गांव वासियों ने बताया कि सभी इस मासले में जिलाधिकारी से मुलाकात करने जाएंगे।

उसने मांग की जाएगी कि रिजवान के खिलाफ दर्ज की गई रिपोर्ट खारिज की जाए। इसके साथ रिजवान के परिवार को मुआवजा देने की बात की जाएगी

पूर्व प्रधान ने बताया कि विधायक से भी मुआवजे की मांग रखी गई है। गौरतलब है कि रविवार को फर्रुखनगर में पटाखों से भरी कार में म्युजिक सिस्टम चलाते ही आग लग गई थी। जिसमें गाना सुन रहे रिजवान के परिवार के चार बच्चों की मौत हो गई थी।

‘बस कृष ठीक हो जाए, मुआवजा बाद की बात है’
हमारा बच्चा ठीक होकर घर आ जाए बस, मुआवजा बाद की बात है। यह कहते हुए बहादुर कृष की मां की गला भर आया। मंगलवार की दोपहर कृष के घर के बाहर सन्नाटा पसरा था।

घर के सामने दो खाट पड़ी थीं, जिन पर कुछ महिलाएं और पुरुष बैठे थे। इनके बीच कृष की हालात सुधरने की बात चल रही थी।

जिस जगह पर पटाखों से भरी कार में आग लगी, वो कृष के घर की दीवार से सटा खाली प्लॉट है। घर पर कृष की मां पुष्पा, दादी प्रेमवती, मानसिक रूप से अक्षम भाई लकी और दो वर्षीय हन दिशा थी।

कृष को चादर में लपेटकर अस्पताल लेकर गए थे पवन
जब पटाखों से भरी कार में हादसा हुआ तो बाहर ही पवन कुमार सैनी खाट पर बैठे थे। उन्होंने बताया कि कार में बैठे बच्चों ने कृष को बुलाया तो वह उनके पास गया। फिर लौट आया।

इसके बाद बच्चे दोबारा बुलाने लगे। इतने में ही धमाका हुआ और कृष कार की ओर दौड़ा, एक बच्चे को कार से खींचने की कोशिश की।

फिर धमाका हुआ और वह भी आग की चपेट में आ गया। सब खड़े देख रहे थे, सब बहुत जल्दी हुआ। जिसके बाद वह चादर लेकर आए और कृष को लपेटकर कार में लेटाया और अस्पताल लेकर गए।

पटाखा कारोबार का लाइसेंस देने से पहले जांच तक नहीं होती
फर्रुखनगर गांव वासियों में पटाखा कारोबार के लिए लाइसेंस दिए जाने की प्रक्रिय पर बेहद रोष है। गांव वासियों का कहना है कि पटाखा कारोबार का लाइसेंस देने से पहले जांच तक नहीं होती कि लाइसेंस लेने वाला व्यक्ति कारोबार करने लायक है भी या नहीं।

पटाखा कारोबार के लिए बगैर अनुभव की जांच के ही नौसिखियों को लाइसेंस दे दिया जाता है। अब पुलिस का तंग करना शुरू हो जाएगा और पैतृक तौर पर पटाखों का कारोबार करने वालों को दिक्कत होगी। गांव वालों का आरोप है कि पुलिस को सिर्फ मौका चाहिए।

गांव के पूर्व प्रधान अहमद फारुख ने कहा कि जब कार चलाने का लाइसेंस देने से पहले कार चलवा कर देखी जाती है, तो पटाखों का लाइसेंस देने पर आवेदक के पटाखा कारोबार के अनुभव की जांच क्यों नहीं होती है।

कारोबार को वैध और अवैध बताकर अनुचित कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि आतिशबाजी के लिए कहीं लाइसेंस की जरूरत नहीं है, अगर ऐसे में हादसा होता तो उसका जिम्मेदार पुश्तों के जमाने से कारोबार कर रहे पटाखा कारोबारी का नहीं है।
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गांव के 80 फीसदी लोगों की रोजी-रोटी पटाखा कारोबार पर टिकी है। अब इस एक घटना से, जोकि सिर्फ एक हादसा है, का सहारा लेकर पटाखा कारोबारियों को परेशान किया जाएगा।

जो बिलकुल उचित नहीं होगा। किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया जाए, जिसे पैतृक पटाखा कारोबारियों को दिक्कत नहीं हो।
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