मेरठ के एक गैंग ने दिल्ली के एक व्यक्ति को सेक्टर-39 स्थित एक मकान के फर्जी दस्तावेज तैयार करके एक करोड़ 30 लाख रुपये में बेच दिया। साढ़े पांच लाख रुपये बतौर बयाना भी ले लिए।
मगर इसी बीच खरीदार ने प्राधिकरण में जाकर कागजों का निरीक्षण किया तो वह दंग रहा गया। फर्जी प्लाट मालिक ने फोन करके रुपये मांगे तो उसे सोरखा मंदिर पर बुलाया।
पीड़ित ने पुलिस को बुलाकर चार आरोपियों को गिरफ्तार करा दिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जी दस्तावेज और चेक आदि बरामद कर लिए हैं।
सेक्टर-49 इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह भड़ाना ने बताया कि दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी रोहित बत्रा एक निजी कंपनी में मैनेजर हैं।
कंपनी का आफिस नोएडा के ही सेक्टर-49 क्षेत्र में है। पिछले सप्ताह मवाना मेरठ के राजीव शर्मा ने उन्हें सेक्टर-39 में बी-107(162 वर्गमीटर) प्लाट को बेचने के लिए संपर्क किया। दोनों के बीच बातचीज हुई और सौदा एक करोड़ 30 लाख रुपये में तय हो गया।
इस बीच शहजाद और अनीस गवाह बने थे जबकि नरेश चंद शर्मा के नाम यह प्लाट था। इस प्लाट का मालिक मोदीनगर निवासी भोपाल को फर्जी दस्तावेज तैयार करके बनाया गया था।
रोहित बत्रा ने 50 हजार रुपये नकद और पांच लाख रुपये का चेक दे दिया। इसके बाद पांच लाख रुपये और देने थे। रुपयों की दूसरी खेप देने से पहले राजीव बत्रा ने नोएडा प्राधिकरण में जाकर दस्तावेज जांच किए तो उनके पैरों तले से जमीन ही खिसक गई।
जो दस्तावेज प्राधिकरण में लगे थे वह हापुड़ निवासी नरेश चंद शर्मा के नाम से थे और फोटो भी दूसरा लगा था। जबकि जो मालिक बनकर उनसे मिला था वह व्यक्ति अलग था। इसके अलावा एग्रीमेंट पर साइन भी अलग पाए गए थे।
पीड़ित रोहित मामला समझ गए कि उनके साथ धोखा हो रहा है। उसी दिन राजीव शर्मा का फिर फोन आया और पांच लाख रुपये की मांग की। बत्रा ने उन्हें सोरखा मंदिर पर आने के लिए कहा और उन्होंने पुलिस को फोन करके घटना बताई। पुलिस भी सादा कपड़ों में मौके पर पहुंच गई और जब उक्त लोग आए तो सभी को मौके से दबोच लिया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पांच लाख रुपये का चेक और फर्जी दस्तावेज बरामद कर लिए हैं। पुलिस की माने तो उक्त लोग मेरठ भी इस तरह का फर्जीवाड़ा कर चुके हैं।