नोएडा सेक्टर-11 स्थित मकान में फैशन डिजायनर प्रज्ञा की हत्या के केस में एडीजे रामनरेश मौर्या की अदालत ने दोषी पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
दोषी ने वर्ष 2011 में पत्नी की ताले से सिर में प्रहार कर और कूलर के तार से गला दबाकर हत्या की थी और शव बेड में छुपा दिया था। अदालत ने शव व सबूत छुपाने के दोष में भी दोषी को तीन साल कैद की सजा सुनाई है। बताया गया है कि प्रज्ञा के मामा वरिष्ठ आईएस अधिकारी हैं।
एडीजीसी ओपी यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता रामसरन नागर ने बताया कि 17 जुलाई 2011 को मिर्जापुर निवासी शिवप्रसाद दूबे ने सेक्टर-24 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
शिवप्रसाद दूबे का कहना था कि उन्होंने फैशन डिजायनर बेटी प्रज्ञा का विवाह 22 जून 2005 को शर्देंदु मिश्रा निवासी गोपीगंज, जिला संत रविदास नगर से की थी। शर्देंदु के बेटी प्रज्ञा से झगड़ा करने की खबर पर वह ट्रेन से नोएडा आ रहा था।
इसी दौरान प्रज्ञा ने मां ने कॉल कर उसे बेटी की हत्या किए जाने की जानकारी दी। पुलिस को सूचना देकर घर पर पड़ताल की गई तो प्रज्ञा का शव उसके बेड से बरामद किया गया। पुलिस ने अगले दिन आरोपी शर्देंदु को गिरफ्तार कर लिया।
पड़ताल में सामने आया कि शर्देंदु प्रज्ञा पर शक करता था। उसका कहना था कि प्रज्ञा जिस कंपनी में काम करती थी, उसने खुद को वहां अविवाहित बताया हुआ था। इसको लेकर दोनों का विवाद चल रहा था।
इसी विवाद में प्रज्ञा की हत्या कर दी गई। अदालत ने केस की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के 12 गवाहों के बयान सुने व दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए हत्या में उम्रकैद व शव छुपाने में 3 साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी को 10 हजार रुपये का अर्थदंड जमा करने का भी निर्देश दिया है।