पटौदी के गांव मऊ-लोकरी में बेटे द्वारा लड़की को ले जाने के मामले में पुलिस प्रताड़ना से तंग किसान हरबीर ने पेड़ में रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना से नाराज आसपास के कई गांवों के लोगों ने घटनास्थल पर पंचायत की।
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पीड़ित परिजनों ने पटौदी थाने के एएसआई राकेश कुमार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। इस दौरान करीब आठ घंटे तक शव पेड़ से लटकता रहा। आरोपी पर केस दर्ज होने के बाद ही पुलिस शव को पेड़ से उतार सकी।
बताया गया है कि हरबीर के बेटे मनोज के खिलाफ 22 अप्रैल को नया गांव की लड़की को ले जाने का केस दर्ज किया गया था। मामले की जांच के लिए मनोज के पिता हरबीर को पुलिस 23 अप्रैल से हर रोज पटौदी थाने में बुला रही थी।
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थाने में हरबीर को डराया-धमकाया गया
किसान हरबीर ने की आत्महत्या
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को भी हरबीर को थाने बुलाया गया था और रात करीब 10 बजे छोड़ा गया। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि थाने में हरबीर को डराया-धमकाया गया और पिटाई कर जेल में बंद करने की धमकी दी गई।
मंगलवार सुबह हरबीर का शव खेत में एक पेड़ पर लटका मिला। जानकारी मिलते ही ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए। घटना से नाराज लोगों ने ऐलान किया कि पेड़ से शव को तब तक उतारने नहीं दिया जाएगा, जब तक एएसआई के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हो जाता।
सूचना मिलते ही एसीपी सुखबीर सिंह, मानेसर के एसीपी अजीत सिंह, सीआईए बिलासपुर के इंस्पेक्टर अनिल पहलवान व थाना प्रबंधक हीरा सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों का कहना था कि हरबीर को थाने में पूछताछ के लिए बुलाकर प्रताड़ित किया गया, जिससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। लोगों ने थाना प्रभारी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। दोपहर में आरोपी एएसआई पर केस दर्ज होने के बाद ही पुलिस शव पेड़ से उतार सकी।
घटना सुनकर दहल गया लोगों का दिल
- फोटो : Demo pic
मऊ-लोकरी निवासी किसान हरबीर इतना सीधा इंसान था कि घर पर पुलिस आने और थाने जाने को बहुत शर्मिंदगी की बात मानता था। उसने गांव वालों से कहा था कि पुलिस इतनी क्रूर होती है इस बात का उसे अंदाजा नहीं था।
पुलिस की प्रताडना ने उसे अंदर से इतना हिला दिया कि उसने जिंदा रहने से अच्छा जीवन खत्म कर देना समझा। पुलिस के खिलाफ रोष प्रकट करते हुए यह बात मृतक हरबीर के चाचा करण सिंह ने बताई।
खेती-किसानी करके घर चला रहे एक पिता को अपने पुत्र मनोज पर लड़की भगाने को लेकर दर्ज मामले की इतनी बड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी, शायद किसी को पता नहीं था।
पिता को भुगतनी पड़ी बेटे के किए की सजा
किसान आत्महत्या
- फोटो : अमर उजाला
पंचायत में आए लोगों के मुताबिक जब से मनोज पर केस दर्ज हुआ था तभी से हरबीर ग्रामीणों से कह रहा था कि उसका बेटा अगर दोषी है तो उसे सजा दो, लेकिन परिवार को और उसे इस तरह रोजाना थाने बुलाकर शर्मिंदा न करो। 22 अप्रैल को नया गांव की लड़की को भगाने का मामला उसके 12वीं में पढने वाले बेटे मनोज पर दर्ज है। तब से उसे रोजाना थाने बुलाया जा रहा था।
यह उस कथित संवेदी पुलिस का चेहरा है जिसका स्लोगन सेवा, सुरक्षा और सहयोग है। हरबीर को न्याय दिलाने के लिए एकजुट ग्रामीणों ने बताया कि सीधा साधा आदमी होने के कारण पुलिस से खौफ खाता था।
जब पुलिस उसे तंग करने लगी तो वह अंदर से टूट गया। महिलाएं भी उसके समर्थन में सड़क पर डटी रहीं। इस घटना ने न सिर्फ मऊ-लोकरी बल्कि अन्य गांवों के लोगों को भी हिला कर रख दिया।
झुलसा देने वाली भीषण गर्मी में भी जब हरबीर को न्याय दिलाने के लिए कई गांवों के लोग एकत्र हुए तो पुलिस के खिलाफ उनका गुस्सा देखकर पुलिस के आला अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को खेतों में पालथी मारकर बैठना पड़ा।
पुलिस वादा करती रही और ग्रामीणा आरोपी पटौदी थाने के एएसआई राकेश कुमार के खिलाफ केस दर्ज करने पर अड़े रहे। ग्रामीणों की आवाज के आगे पुलिस को तुरंत एफआईआर करके मौके पर उसकी कॉपी मंगानी पड़ी।
इस बारे में पुलिस मौके पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं थी। इस बावत एसीपी सुखबीर सिंह से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया, जबकि पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।