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फंसाने का हथियार भी बन रहा है दुष्कर्म

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दिल्ली के ख्याला निवासी रवि पड़ोस की लड़की से प्रेम करता था। दोनों में दो साल से प्रेम संबंध थे। लड़की बालिग थी लेकिन उसके परिजनों ने रवि के खिलाफ पॉक्सो के तहत यौन शोषण का मुकदमा दर्ज करा दिया।
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मुकदमे का फैसला होने से पहले ही रवि ने आत्महत्या कर ली। पुलिस अब मामले में क्लोजर रिपोर्ट फाइल करने की तैयारी कर रही है। राजधानी में ऐसे फर्जी मुकदमों की बाढ़ सी आई हुई है, जिनकी चपेट में युवक, कारोबारी व वकील आ चुके हैं।

कहीं शातिर महिलाएं तो कहीं गैंग कानून का गलत इस्तेमाल कर रहा है। दुष्कर्म संबंधी कानून के दुरुपयोग पर अदालतें भी चिंता जाहिर कर चुकी हैं। कई मुकदमों को फर्जी करार दिया जा चुका है लेकिन कथित पीड़िताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती।
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एक महिला ने दर्ज कराए दर्जन भर मामले

शातिर महिलाओं ने दुष्कर्म संबंधी कानून को रंगदारी वसूलने के लिए खतरनाक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। राजधानी के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ये महिलाएं दर्जनों मुकदमे दर्ज करा रही हैं।

पूर्वी दिल्ली में भी एक महिला ने दुष्कर्म के करीब एक दर्जन मुकदमे दर्ज करवाए। महिला के खिलाफ रंगदारी के करीब आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। कई मामलों में यह महिला पीओ (भगोड़ा) भी है।

एक पुराने मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने उसके खिलाफ डरा-धमका कर रंगदारी मांगने के आरोप में मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। महिला गिरफ्तारी के बाद 11 जुलाई 2013 से तिहाड़ जेल में है।

संगठित गैंग करा रहे मामले दर्ज

रोहिणी जिला अदालत में एक मामले में आरोपी नरेंद्र पाल कश्यप के पिता ने इस मामले के पीछे संगठित गिरोह का हाथ बताया। उनका आरोप था कि पीड़िता संगठित गिरोह की सदस्य है और दुष्कर्म के करीब दस मामलों में कई लोगों पर केस दर्ज करा रखे हैं। डीसीपी की रिपोर्ट में भी इस तथ्य का खुलासा हुआ।
 
लिव-इन रिलेशन के कुछ मामलों में युवती सहमति से शारीरिक संबंध बनाती हैं और विवाद होने पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करा दिया जाता है। सहमति से शारीरिक संबंध व लिव-इन में रहना कानून की नजर में अपराध नहीं है।

इसके मद्देनजर पुलिस आयुक्त ने मौखिक आदेश पुलिस को दिया है कि लिव-इन या सहमति से बने शारीरिक संबंधों के बाद दर्ज मामलों में संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी की अनुमति के बाद ही गिरफ्तारी की जाए।

नुकसान की करनी होगी भरपाई

कानून का दुरुपयोग करने वाली महिलाएं इतनी खतरनाक हैं कि पुलिस भी आसानी से उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं करती। पूर्वी दिल्ली में मुकदमे दर्ज कराने वाली महिला को अदालत भगोड़ा घोषित कर चुकी है लेकिन पुलिस उस पर हाथ नहीं डालती।

जो उसके सामने आने की कोशिश करता है, वह उसके खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करा देती है। ऐसे एक मामले में आरोपी की जमानत कराने वाले अधिवक्ता आरके चौधरी भी फंस चुके हैं। उनके व अन्य कई लोगों के खिलाफ थाना तिलक मार्ग में महिला ने मुकदमा दर्ज कराया था।
 
वसंत विहार गैंगरेप के बाद सरकार ने दुष्कर्म संबंधी कानून में संशोधन कर उसे ज्यादा कठोर बनाया ताकि अपराधियों को कड़ी सजा मिले। सरकार ने विशेष अदालतें बनाईं, जिससे पीड़िता को शीघ्र न्याय मिले। कानून में बदलाव के बाद पुलिस ने आनन-फानन में दुष्कर्म व यौन शोषण के मुकदमे दर्ज करने शुरू कर दिए। इसके बाद दुष्कर्म के मुकदमों की बाढ़ आ गई। इनमें से कई फर्जी थे।
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देखिए एनसीआरबी के आंकड़े़

- 2012 में 24923 मामले दर्ज हुए देश में
- 2013 में 33707 मामले दर्ज हुए देश में
- 95 फीसदी में पेश हुई चार्जशीट
- 27 फीसदी मामलों में सजा हुई
- 63 फीसदी में आरोपी बरी हुए

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