दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने फर्जी कागजातों से दिल्ली पुलिस, रेलवे पुलिस, रेलवे ग्रुप डी और एसएससी में नौकरी लगवाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस गिरोह के जरिए फर्जी कागजातों से दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए तीन सिपाहियों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
सिपाहियों की जगह परीक्षा भी किसी और ने दी थी। गिरफ्तार तीनों सिपाही व गिरोह के आरोपी झज्जर, हरियाणा के रहने वाले हैं। अपराध शाखा अधिकारियों की माने तो फर्जी कागजातों से दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए दो से तीन सिपाहियों की जल्द ही गिरफ्तारी कि जाएगी।
अपराध शाखा केसंयुक्त पुलिस आयुक्त रविन्द्र यादव के अनुसार झज्जर, हरियाणा निवासी अमित कुमार ने अपराध शाखा में शिकायत दी थी कि फर्जी कागजातों से दिल्ली पुलिस, रेलवे पुलिस, रेलवे ग्रुप डी और एसएससी में नौकरी लगवाने वाला गिरोह सक्रिय है।
गिरोह केसदस्यों ने वर्ष 2012 में दिल्ली पुलिस में भर्ती करवाने के लिए दस उम्मीदवारों से 12 लाख रुपये लिए थे। गिरोह केसदस्यों ने ग्रुप डी सर्विस, रेलवे में भर्ती करवाने के लिए प्रति उम्मीदवार सात लाख रुपये लिया था। गिरोह के सदस्य फर्जी अंकतालिका, ड्राइविंग लाईसेंस समेत अन्य कागजातों का प्रबंध करते थे।
शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में ये भी कहा था कि उसके गांव के कुछ लोग वर्ष 2012 व 2013 में फर्जी अंकतालिका व उनकी जगह पेपर देने वाले की मदद से दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए थे। अपराध शाखा ने मामला दर्जकर एसीपी ईश्वर सिंह की देखरेख में एसआई राजीव मलिक की टीम ने तफ्तीश शुरू की।
पुलिस टीम ने तफ्तीश के बाद फर्जी कागजातों से दिल्ली पुलिस में भर्ती हुए तीन सिपाही गांव लाडरावन सदर बहादुरगढ़, झज्जर हरियाणा निवासी अशोक(28), विजय(25) और विनोद चिकारा (28)स्त्र को दस अगस्त को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ के बाद करावल नगर निवासी व मै. आईबीओआईएस प्राइवेट लि. में काम करने वाले मोहित को गिरफ्तार कर लिया।
विनोद है गिरोह का मास्टरमाइंड
पूछताछ में पता लगा कि तीनों सिपाही दिल्ली पुलिस में फर्जी कागजातों से भर्ती हुए थे। विनोद ने बताया कि मोहित दिल्ली पुलिस की सिपाही की परीक्षा आयोजित करवाने में सहायता करने वाली कंपनी बायोमेट्रिक कंपनी में काम करता था। मोहित ने विनोद की बिना फिंगर पि्रंट दिए परीक्षा आयोजित करवाई थी।
विनोद ने बताया कि उसका प्रश्नपत्र किसी और ने हल किया था। उसने ये भी बताया कि हरियाणा केराकेश उर्फसौदा ने उसने फर्जी सर्टिफिकेट उपलब्ध करावाए थे। नारनौल के सोनी व स्वामी ने इसके लिए प्रश्नपत्र हल किया था।
अपराध शाखा इस बात की जांच कर रही है कि फर्जी कागजातों से कितने उम्मीदवार दिल्ली पुलिस व अन्य पुलिस बल में भर्ती हुए हैं। विनोद चिकारा को इस गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।